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NCRB Report: सड़क दुर्घटना के आंकड़ों में नहीं कोई सुधार, 10 से अधिक कृषि श्रमिकों ने की आत्महत्या

NCRB Report: सड़क दुर्घटना के आंकड़ों में नहीं कोई सुधार, 10 से अधिक कृषि श्रमिकों ने की आत्महत्या

हाईलाइट

  • लापरवाही के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 1,35,051 मौतें हुईं
  • 2018 में किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 5,763 लोगों ने आत्महत्या की
  • आत्महत्या करने वाले 10,349 व्यक्तियों में से 4,586 कृषि मजदूर थे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया-2018 के अनुसार, वर्ष 2018 के दौरान लापरवाही के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 1,35,051 मौतें हुईं। आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में पिछले दो वर्षों की तुलना में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। देश भर में 2017 में कुल 1,34,803 मौत की घटनाएं दर्ज की गई, जबकि 2016 में यह आंकड़ा 1,35,656 था। हिट एंड रन मामलों में पिछले साल की तुलना में बड़ी वृद्धि देखने को मिली है। 2017 में जहां हिट एंड रन के 43,727 मामले सामने आए, वहीं 2018 में इनकी संख्या बढ़कर 47,028 तक पहुंच गई।

क्राइम इन इंडिया-2018 पर एनसीआरबी की रिपोर्ट के लिए डेटा संग्रह की प्रक्रिया राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय एजेंसियों से पुष्टि के साथ जुलाई 2019 से दिसंबर 2019 तक जारी रही। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2018 के दौरान किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 5,763 लोगों ने आत्महत्या की। क्राइम इन इंडिया-2017 पर एनसीआरबी की रिपोर्ट जारी होने के लगभग तीन महीने बाद सरकार ने वार्षिक डेटा जारी किया है।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2018 में आत्महत्या करने वाले 10,349 व्यक्तियों में से 4,586 कृषि मजदूर थे। एनसीआरबी के आंकड़ों में कहा गया है कि 2018 में देश में कृषि क्षेत्र में आत्महत्या करने वालों की संख्या कुल आत्महत्या करने वालों (1,34,516) की 7.7 फीसदी रही। भारत में जहां 2017 में 1,29,887 आत्महत्याएं हुई थी, वहीं 2018 में इनकी संख्या बढ़कर 1,34,516 हो गई। आत्महत्या की दर भी जहां 2017 में 9.9 फीसदी थी, वह 2018 में बढ़कर 10.2 फीसदी हो गई है।

2017 में कुल 10,655 किसानों की आत्महत्याएं दर्ज की गईं। वर्ष 2018 में पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, मेघालय, गोवा, चंडीगढ़, दमन और दीव, दिल्ली, लक्षद्वीप और पुदुचेरी में किसान या खेती से जुड़े और खेतिहर मजदूरों द्वारा कोई भी आत्महत्या दर्ज नहीं की गई।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।