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दक्षिण दिल्ली में 16,500 पेड़ काटे जाने पर NGT ने लगाई रोक

July 03rd, 2018 00:55 IST

हाईलाइट

  • एनजीटी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 16500 हजार पेड़ काटने के मामले में रोक लगा दी है।
  • सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हाईकोर्ट के पेड़ कटाई के रोक वाले फैसले को बरकरार रखा है।
  • इस पूरे मामले में एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) को नोटिस जारी किया है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एनजीटी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 16500 हजार पेड़ काटने के मामले में रोक लगा दी है। सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हाईकोर्ट के पेड़ कटाई के रोक वाले फैसले को बरकरार रखा है। इस पूरे मामले में एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी), एनडीएमसी, एसडीएमसी, डीडीए और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है।

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी एजेंसियों को हाईकोर्ट के आदेश को लागू रखने के लिए आदेश दिया है। यानी 16,500 पेड़ो की कटाई पर रोक यथावत रहेगी। इस मामले में सभी जवाब-सवाल अगली सुनवाई में 19 जुलाई को होंगे। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि एनजीटी में मामले की सुनवाई तक रोक लगाएं। अदालत ने एनबीसीसी के पेड़ काटने पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि आप आवास बनाने के लिए हजारों पेड़ काटना चाहते है और क्या दिल्ली ये अफोर्ड कर सकती हैं। हाईकोर्ट ने इस दौरान एनबीबीसी से कहा है कि क्या आपके पास एनजीटी का ऐसा आदेश है जिसमें कहा गया हो कि आप आवास के लिए पेड़ काट सकते हैं। अगर सड़क निर्माण के लिए पेड़ काटना होता तो अलग बात थी, लेकिन आवास के लिए काटना किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है। 

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बता दें कि सरकारी आवासों के निर्माण के लिए नॉर्थ दिल्ली में करीब 16 हजार पेड़ काटे जाने थे। केन्द्र से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन पर्यावरण एक्टिविस्ट डॉ कौशल कांत मिश्र ने इस पूरे मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में पेड़ न काटे जाने को लेकर अर्जी दाखिल की थी। उसमें कहां गया है कि जहां पड़े काटने हैं वो कॉलोनियां है सरोजनी नगर, नौरोजी नगर, नेताजी नगर, त्यागराज नगर, मोहम्मदपुर और कस्तूरबा नगर शामिल है। इस मामले में दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पर्यावरण सचिव को खत लिखा था। जिसमें प्रोजेक्ट रिपोर्ट दोबारा देने और पेड़ काटे जाने की बजाए आवास योजना को दूसरे इलाकों में शिफ्ट करने की बात कही थी। आज फिर इस मामले को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एनबीसीसी के पक्ष को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए 4 जुलाई तक पेड़ो की कटाई पर रोक लगा दी।


 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।