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सौगात: मोदी सरकार का बड़ा ऐलान- कृषि के लिए 1 लाख करोड़ का फंड जारी, किसानों के खातों में 17 हजार करोड़ ट्रांसफर


हाईलाइट

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि विकास के लिए 1 लाख करोड़ का फंड जारी किया
  • ‘पीएम-किसान योजना’ के अंतर्गत सहायता राशि की छठी किस्त भी जारी की
  • 8.5 करोड़ किसानों के खातों में 17,000 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर किए गए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि विकास को लेकर बड़ा ऐलान किया है। पीएम मोदी ने कृषि के क्षेत्र में किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए 1 लाख करोड़ का फंड जारी किया है। कोरोनावायरस महामारी के संकट समय में ये फंड किसानों  के लिए बहुत मददगार साबित होगा। इसके साथ ही मोदी सरकार ने ‘पीएम-किसान योजना’ के अंतर्गत सहायता राशि की छठी किस्त भी जारी की है। इसके तहत 8.5 करोड़ किसानों के खातों में 17,000 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर किए गए हैं।

पीएम मोदी ने देश की जनता को खासतौर पर किसानों को बलराम जयंती, हलछठ, और दाऊ जन्मोत्सव की शुभकामनाएं भी दी हैं। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह घोषणाएं की हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के किसान, आम नागरिक और को-ऑपरेटिव मेंबर भी ऑनलाइन जुड़े हैं।

पीएम मोदी के संबोधन की अहम बातें 

  • दशकों से ये मांग और मंथन चल रहा था कि गांव में उद्योग क्यों नहीं लगते। अब आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किसान और खेती से जुड़े इन सारे सवालों के समाधान ढूंढे जा रहे हैं। एक देश, एक मंडी के जिस मिशन को लेकर बीते 7 साल से काम चल रहा था, वो अब पूरा हो रहा है। 
  • पहले e-NAM के ज़रिए, एक टेक्नॉलॉजी आधारित बड़ी व्यवस्था बनाई गई। अब कानून बनाकर किसान को मंडी के दायरे से और मंडी टैक्स के दायरे से मुक्त कर दिया गया। अब किसान के पास अनेक विकल्प हैं।
  • अब हम उस स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां गांव के कृषि उद्योगों से फूड आधारित उत्पाद शहर जाएंगे और शहरों से दूसरा औद्योगिक सामान बनकर गांव पहुंचेगा। यही तो आत्मनिर्भर भारत अभियान का संकल्प है, जिसके लिए हमें काम करना है।
  • 2 दिन पहले ही, देश के छोटे किसानों से जुड़ी एक बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की गई है, जिसका आने वाले समय में पूरे देश को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। देश की पहली 'किसान रेल' महाराष्ट्र और बिहार के बीच में शुरु हो चुकी है।
  • किसानों से जुड़ी जितनी भी योजनाएं हैं, जितने भी रिफॉर्म हो रहे हैं, इनके केंद्र में हमारा छोटा किसान है। यही छोटा किसान है, जिस पर सबसे ज्यादा परेशानी आती रही है। इस छोटे किसान तक सरकारी लाभ पूरी तरह पहुंचे, ये हमारा संकल्प है।
  • 'किसान रेल' पूरी तरह से वातानूकुलित है। ये एक तरह से पटरी पर दौड़ता कोल्ड स्टोरेज है। इससे शहर के लोगों को ताजी वस्तुएं मिल सकेंगी और किसानों को अपनी फसल स्थानीय मंडियों पर मजबूरन बेचना नहीं पड़ेगा।
  • देश के बड़े शहरों तक छोटे किसानों की पहुंच हो रही है तो वो ताजा सब्जियां उगाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, पशुपालन और मत्स्यपालन की तरफ प्रोत्साहित होंगे। इससे कम जमीन से भी अधिक आय का रास्ता खुल जाएगा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
  • ये जितने भी कदम उठाए जा रहे हैं, इनसे 21वीं सदी में देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदलेगी, कृषि से आय में भी  वृद्धि होगी। हाल में लिए गए हर निर्णय आने वाले समय में गांव के नज़दीक ही व्यापक रोज़गार तैयार करने वाले हैं।
  • ये हमारे किसान ही हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान देश को खाने-पीने के जरूरी सामान की समस्या नहीं होने दी। देश जब लॉकडाउन में था, तब हमारा किसान खेतों में फसल की कटाई कर रहा था और बुआई के नए रिकॉर्ड बना रहा था।
  • लॉकडाउन के पहले दिन से दिवाली व छठ तक, 8 महीने तक, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन आज हम दे पा रहे हैं, तो उसके पीछे हमारे किसानों की तपस्या जुड़ी है। हमारे किसानों ने अगर इतनी बड़ी तपस्या न की होती, तो हम ये काम न कर पाते।
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