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बोहरा समाज से बोले पीएम मोदी, कहा- मेरा आपसे पुराना रिश्ता

September 14th, 2018 15:40 IST
बोहरा समाज से बोले पीएम मोदी, कहा- मेरा आपसे पुराना रिश्ता

हाईलाइट

  • बोहरा समाज के वाअज़ में शमिल हुए पीएम मोदी
  • शिया मस्जिद में बोहरा समाज के लोगों को किया संबोधित
  • दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौला से की मुलाकात

डिजिटल डेस्क, भोपाल। इंदौर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिया मस्जिद में बोहरा समाज के लोगों को संबोधित किया। यह दूसरा मौका है, जब मोदी मोहर्रम की वाअज यानी प्रवचन में शामिल हुए। इससे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए वे सूरत में हुई मोहर्रम की वाअज में शामिल हुए थे। पीएम मोदी ने दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौलाना से मुलाकात की है। इस दौरान धर्मगुरू ने पीएम मोदी को जन्मदिन की अग्रिम बधाई दी। पीएम मोदी वाअज में शामिल होने के बाद सांघी मैदान के लिए रवाना हो चुके हैं। इसके बाद वे वापस दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। 

पीएम मोदी ने कहा...
मैं जब गुजरात का प्रधानमंत्री था तब मुझे बोहरा समाज का कदम-कदम पर साथ मिला। पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी के बीच में आना हमेशा मुझे प्रेरणा देता है, एक नया अनुभव देता है। अशरा मुबारक, के इस पवित्र अवसर पर आपने मुझे बुलाया इसलिए आपका आभारी हूं।उन्होंने कहा कि बोहरा समाज हमेशा से शांति का पैगाम देता रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इमाम हुसैन अमन और इंसाफ के लिए शहीद हो गए। बोहरा समाज दुनिया को हमारे देश की ताकत बता रहा है। हमें अपने अतीत पर गर्व है, वर्तमान पर विश्वास है। बोहरा समाज ने शांति के लिए जो योगदान दिया है, उसकी बात हमेशा मैं दुनिया के सामने करता हूं। बोहरा समाज की भूमिका राष्ट्रभक्ति के प्रति सबसे अहम रही है।धर्मगुरु अपने प्रवचन के माध्यम से अपनी मिट्टी से मोहब्बत की बातें कहते हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा...
बोहरा समाज के वाअज में शामिल हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, बोहरा समाज एक ऐसा समाज है जिसने हमेशा देश की मदद की है। देश से मोहब्बत की है। बोहरा समाज सबसे अनुशासित समाज रहा है। 

बता दें कि दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौला बुधवार से सैफी नगर मस्जिद में 9 दिनी वाअज फरमा रहे है। वाअज सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक होगी। यह पहला मौका था जब कोई प्रधानमंत्री बोहरा समाज की वाअज में शामिल हुए। कार्यक्रम में सैयदना 15 मिनट हिंदी में बोलेंगे। इसके बाद 15 मिनट प्रधानमंत्री और 10 मिनट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संबोधित किया। गौरतलब है कि वाअज में सैयदना गुजराती, उर्दू और अरबी का इस्तेमाल करते हैं।

पीएम मोदी के इंदौर आगमन के राजनीतिक मायने भी लगाए जा रहे है। चूंकि बोहरा समाज के 35 हजार लोग शहर में रहते हैं, जबकि साढ़े चार लाख आबादी प्रदेश में, वहीं देश में 20 लाख बोहरा समाजजन हैं। इसी साल प्रदेश और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के साथ ही राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होना है। यही वजह है कि चुनावी राज्य के इस शहर में हो रहे इस आयोजन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति को राजनीतिक फायदे और चुनावी कैंपेन की अप्रत्यक्ष शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। 

मीडिया को प्रवेश नहीं
शहर का हर वो हिस्सा जहां वाअज रिले की जाएगी वहां सैफी एम्बुलेंस खड़ी की गई थी। पीएम मोदी के दौरे के चलते इंदौर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए थे। पुलिस के 3500 जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। शहर के 500 डॉक्टर्स मेडिकल इमरजेंसी के लिए उपलब्ध रहे। साथ ही इस कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए सैयदना साहब के 15 हजार सुरक्षा कर्मी भी तैनात किए गए थे। शहर में स्वच्छता बनी रहे, इसके लिए नजाफत कमेटी बनाई गई, जिसमें 800 लोग हैं। ये चप्पे-चप्पे पर खड़े हैं, ताकि वाअज़ के दौरान देश के सबसे स्वच्छ शहर में एक भी जगह कचरा न दिखाई दे। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंदौर एयरपोर्ट पर आने के बाद सड़क मार्ग के जरिये सैफी मस्जिद पहुंचे। उनका काफिला एयरपोर्ट से कालानी नगर, रामचंद्र नगर चौराहा, बड़ा गणपति, राज मोहल्ला चौराहा, गंगवाल बस स्टैंड, महू नाका, कलेक्ट्रेट, फल्सीकर, मणिकबाज ब्रिज होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तिराहा से होते हुए सैफी नगर मस्जिद पहुंचा।


 

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jpg September 15th, 2018 09:16 IST

सब धर्म सम भाव ! जब तक हम सभी (धर्म) अपने देश को अपना नहीं समझेंगे तब तक हम स्वयं का भी ओर देश का विकास नहीं कर सकते ! हम संपन हमारा देश संंपन !

Praful dusane September 14th, 2018 11:19 IST

मे दैनिक भासकंर के माधयम से माननीय पृधानमत्री जी एवम आदरणीय मुखयमंत्री जी को ये सनदेंश दे रहा हू कि ये कहते है कि बेटी बचाओ और बेटी पढाऔ पर केसे पढाये सरकारी शाला की भी फीस साल की (40000)हो गई हेै। जो कि पहले साल की (2000) हुआ करती थी ईतने जलदी तो सैलरी भी नही बढती है अब आप बताए की महीने की(9700रू)की सैलरी लेने वाला ये फीस केसे भरेगा। सूचनारथ

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।