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वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी! 

वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी! 

हाईलाइट

  • वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ प्रियंका को उतार सकती है कांग्रेस।
  • अभी तक नहीं हुई है वाराणसी के उम्मीदवार की घोषणा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रियंका पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी को लेना है। 

महासचिव बनने के बाद से राजनीति में सक्रिय हैं प्रियंका
दरअसल पार्टी महासचिव बनने के बाद से ही प्रियंका काफी सक्रिय नजर आ रही हैं। वो लगातार पार्टी के लिए यूपी के अलग-अलग इलाकों में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रही हैं। पिछले दिनों उन्होंने एक समर्थक के सवाल पर वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात भी कही थी। वहीं शनिवार को यूपी की सीटों के लिए जारी सूची में एक बार फिर वाराणसी के उम्मीदवार की घोषणा नहीं हो पाई है। 

मोदी के खिलाफ सबसे मजबूत कैंडिडेट प्रियंका
कांग्रेस नेतृत्व प्रियंका की उम्मीदवारी की अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रियंका के चुनाव लड़ने की संभावना को खारिज भी नहीं किया है। उन्होंने कहा, अगर इस संबंध में कोई फैसला लिया जाता है और तो इसके बारे में तय किए जाने के बाद जानकारी दी जाएगी। प्रियंका गांधी इसी साल औपचारिक रूप से पार्टी की राजनीति में शामिल हुई हैं और उन्हें पूर्वी यूपी का प्रभारी महासचिव भी नियुक्त किया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वह 2014 में ही पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहती थीं। वह पीएम मोदी के खिलाफ सबसे मजबूत कैंडिडेट के रूप में देखी जा रही हैं। 

वाराणसी में पूजा-पाठ, रोड शो 
प्रियंका के रोड शो और बोट यात्रा से भी संकेत मिले हैं कि वो मोदी से संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ सकती हैं। प्रियंका ने बनारस में बाबा काशी विश्वनाथ के मंदिर दर्शन भी किए, शहीदों के परिजनों से भी मिलीं और रोड शो किया। वाराणसी से ही प्रियंका ने अपनी बोट यात्रा की शुरुआत की थी। सूत्रों की मानें तो, प्रियंका खुद सीधे पीएम मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।

मजबूती के आकलन के लिए हुआ आंतरिक सर्वे
पार्टी सूत्रों का कहना है, कांग्रेस की मजबूती का आकलन करने के लिए इलाहाबाद और वाराणसी में आंतरिक सर्वे किया गया। पार्टी ने इन दोनों ही सीटों से किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। वाराणसी से 2004 में विजयी रहे राजेश मिश्रा को पड़ोसी सलेमपुर से टिकट दिया गया। 2014 में अजय राय को टिकट दिया गया था। 

2014 में तीसरे नंबर पर थे कांग्रेस प्रत्याशी
पिछले चुनाव यानि 2014 में मोदी के सामने आप, सपा, बसपा, कांग्रेस चुनाव लड़ी थी। नरेंद्र मोदी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल से 3,71,784 वोटों के अंतर से जीते थे। नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले थे। वहीं दूसरे स्थान पर रहे केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय 75,614 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे। वाराणसी लोकसभा में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी विजय प्रकाश जायसवाल चौथे स्थान पर रहे। उन्हें 60,579 वोट मिले थे। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कैलाश चौरसिया 45,291 मतों के साथ पांचवें स्थान पर थे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।