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सिंधिया की जनसभा: इधर मंच पर भाषण देते रहे नेता, उधर किसान ने दम तोड़ा

सिंधिया की जनसभा: इधर मंच पर भाषण देते रहे नेता, उधर किसान ने दम तोड़ा

हाईलाइट

  • किसान की मौत के बाद भी नेता देते रहे भाषण
  • सिंधिया ने किसान को श्रद्धांजलि दी

डिजिटल डेस्क, खंडवा। मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए इन दिनों जोर-शोर से राज्य के शीर्ष नेता प्रचार में जुटे हुए हैं, लेकिन इसी चुनावी सभा के दौरान खंडवा जिले के मंधाता विधानसभा सीट पर चुनावी सभा में एक आए एक किसान की मौत हो गई, जिस पर अब सियासत शुरू हो गई है। इस सभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रत्याशी के पक्ष में सभा करने ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा में भाषण सुनने आए बुजुर्ग किसान की मौत हो गई। सभा में यह किसान पीछे खाली कुर्सियों में बैठा था और बैठे-बैठे ही उसका शरीर ठंडा हो गया। बाद में अस्पताल ले जाया गया जहां मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताया गया।

किसान की मौत के बाद भी नेता देते रहे भाषण
दरअसल, मंधाता विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में रविवार बीजेपी के स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे। सिंधिया के आने से पहले स्थानीय नेताओं के भाषण चल रहे थे। इसी दौरान जब पंधाना से बीजेपी विधायक राम दांगोरे भाषण दे रहे थे, तभी वहां तभी वहां मौजूद 80 साल के किसान जीवन सिंह की अचानक मृत्यु हो गई। जब लोगों की भीड़ सभा में बढ़ी तब किसान के स्थिर शरीर को देखा। किसान को तुरंत ही अस्पताल भेजा गया जहां मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। दुःख इस बात का रहा कि किसान ने सभा की कुर्सी पर दम तोड़ा और नेता भाषण देते रहे।

सिंधिया ने किसान को श्रद्धांजलि दी
बाद में सिंधिया ने अपने भाषण से पहले मंच से उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखा। कायदा ये था कि मौत के बाद सभा खत्म कर दी जानी चाहिए थी। कांग्रेस ने सिंधिया और बीजेपी के इस रवैए की निंदा की है।

कांग्रेस ने साधा निशाना
बताया जा रहा है कि जीवन सिंह बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता भी थे। हालांकि सवाल उठ रहा है कि जब कोरोना के खतरे को देखते हुए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बुजुर्गों के जाने पर मनाही है तो राजनीतिक सभा में 80 साल के बुजुर्ग को क्यों आने दिया गया। ज्योतिरादितय सिंधिया की सभा में किसान की मौत की अनदेखी कर सभा जारी रखने को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस इस बात को लेकर बीजेपी को आड़े हाथ ले रही है कि एक किसान की मौत के बाद भी जनसभा को क्यों जारी रखा गया।

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