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असम NRC फाइनल ड्राफ्ट पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- अभी कोई कार्रवाई न करे सरकार

August 01st, 2018 12:04 IST
असम NRC फाइनल ड्राफ्ट पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- अभी कोई कार्रवाई न करे सरकार

हाईलाइट

  • असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) के फाइनल ड्राफ्ट पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई।
  • कोर्ट ने कहा- अभी इस ड्राफ्ट पर एक्शन लेने की जरुरत नहीं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों को अपने दावे साबित करने के लिए पूरा समय दिया जाना चाहिए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) के फाइनल ड्राफ्ट पर छिड़ी बहस अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई  है। इस ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम शामिल न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी इन लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह अंतिम NRC की लिस्ट नहीं है, यह महज एक ड्राफ्ट है, इसलिए इस पर केन्द्र सरकार को एक्शन लेने की जरुरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम इस ड्राफ्ट में शामिल नहीं है, उन्हें अपने दावे और आपत्तियां जताने के लिए पूरा समय दिया जाना चाहिए।

जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने इस मामले को सुना। सुनवाई के दौरान असम NRC समन्यवक शैलेश ने कोर्ट में बताया कि 40 लाख से ज्यादा लोगों का नाम फाइनल ड्राफ्ट में नहीं है। इसमें से 37.59 लाख नामों को अस्वीकार कर दिया गया और 2.89 लाख नामों पर अभी फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक ड्राफ्ट है, अभी लोगों को अपने दावों और आपत्तियां के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे।

सुनवाई के दौरान बेंच ने NRC समन्वयक से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिज़र से जुड़े सवाल भी पूछे। बेंच ने कहा कि लोगों के सत्यापन में किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, यह जानकारी कोर्ट को उपलब्ध कराई जाए। बेंच ने इसके लिए 16 अगस्त की तारीख भी निर्धारित की है। कोर्ट ने केन्द्र सरकार को भी इस मामले में दावों और आपत्तियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट रविवार को जारी किया गया था। इसमें 3, 29,91,380 लोगों में से 2,89,38, 677 को असम की नागरिकता के लिए योग्य पाया गया था। इस ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। इन 40 लाख लोगों को अवैध भारतीय माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें अपने दावे और आपत्तियों के लिए समय दिया गया है। बता दें इस मामले पर जमकर सियासी बहस छिड़ी हुई है। सोमवार और मंगलवार को सदन में भी इस ड्राफ्ट के खिलाफ विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।