comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

कार्ति और उनकी पत्नी के खिलाफ कर चोरी मामले में आयकर विभाग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

November 16th, 2020 22:01 IST
 कार्ति और उनकी पत्नी के खिलाफ कर चोरी मामले में आयकर विभाग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

हाईलाइट

  • कार्ति और उनकी पत्नी के खिलाफ कर चोरी मामले में आयकर विभाग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और उनकी पत्नी के खिलाफ सात करोड़ से अधिक की कर चोरी के मामले में आयकर विभाग को सोमवार को नोटिस जारी किया।

न्यायाधीश अशोक भूषण और आर. सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता इन याचिकाओं की एक प्रति सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय में भेज सकता है।

मई में मद्रास हाईकोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति और उनकी पत्नी की ओर से सांसदों और विधायकों के लिए मामला निचली अदालत से एक विशेष अदालत में स्थानांतरित करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट ने इस मामले में आयकर विभाग द्वारा दर्ज शिकायत को रद्द करने के लिए दंपति की ओर से दायर एक और दलील पर सुनवाई करने से मना कर दिया था।

दंपति ने मामले में दोषमुक्ति की मांग की है। कार्ति ने मामले को सांसदों/विधायकों के लिए एक फास्ट-ट्रैक अदालत में स्थानांतरित करने को भी चुनौती दी है।

यह मामला कार्ति द्वारा 6.38 करोड़ रुपये की आय और 2015 में उनकी पत्नी श्रीनिधि द्वारा अर्जित की गई 1.35 करोड़ रुपये की आय का कथित तौर पर खुलासा नहीं करने से जुड़ा है।

हाईकोर्ट ने कार्ति की इस दलील को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कथित अपराध की तारीख या शिकायतें दर्ज होने के समय वह न तो सांसद और न ही विधायक थे।

कार्ति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष दलील दी कि अभियोजन पक्ष आयकर अधिनियम की धारा 276 सी और 277 के तहत है, जो गैर-सं™ोय अपराध हैं, लेकिन शिकायत दर्ज होने पर कोई नामित अदालत नहीं थी।

उन्होंने कहा, कानून यह है कि अगर इस मामले में 12 सितंबर, 2018 को शिकायत दर्ज करने की तारीख के समय कोई विशेष अदालत नहीं है, तो अदालत, जिसके समक्ष मामला लंबित है, वही मामले की सुनवाई जारी रखेगी।

सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के सभी निष्कर्ष उनके मुवक्किल के पक्ष में हैं। उन्होंने मामले को विशेष अदालत में भेजने को भेदभावपूर्ण बताया।

आयकर विभाग के अनुसार, कार्ति और उनकी पत्नी ने अपने आई-टी रिटर्न में मुत्तुकाडु में एक भूमि की बिक्री के लिए प्राप्त नकदी का खुलासा नहीं किया।

एकेके/जेएनएस

कमेंट करें
6QUfg
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।