सोनम वांगचुक जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा: NSA के तहत हुई थी गिरफ्तारी, गृह मंत्रालय ने बताया क्यों लगाया था ये एक्ट, अब इस तारीख को सुप्रीम कोर्ट में होगी अंतिम सुनवाई

NSA के तहत हुई थी गिरफ्तारी, गृह मंत्रालय ने बताया क्यों लगाया था ये एक्ट, अब इस तारीख को सुप्रीम कोर्ट में होगी अंतिम सुनवाई
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को आज (14 मार्च) को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है। उनको राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

डिजिटल डेस्क, जयपुर। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को आज (14 मार्च) को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है। उनको राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। जिस शनिवार को केंद्र सरकार ने वापस ले लिया है। गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए बताया कि सोनम वांगचुक ने एनएसए एक्ट के तहत अपनी गिरफ्तारी की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।

मंत्रालय का यह आदेश सामने आने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आज सुबह करीब 10 बजे जोधपुर जेल पहुंचीं। इसके बाद कानूनी कागजी कार्रवाई को पूरा किया गया और फिर उन्हें दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर जेल से बाहर निकाल दिया गया।

इस वजह से हुई गिरफ्तारी?

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हुए थे। इस दौरान 24 सितंबर, 2025 को लेह में हिंसा हो गई थी। इसके दो दिन बाद उन्हें 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में ले लिया था। जहां से उन्हें तुरंत जोधपुर जेल शिफ्ट कर दिया था। उन्होंने 170 दिन जेल में बिताने के बाद रिहा कर दिया गया।

बता दें कि एनएसए सरकार को ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है, जो देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो सकता है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हाउस अरेस्ट भी किया जा सकता है। इस दौरान उसके आसपास कड़ी सुरक्षा होती है।

केंद्र सरकार ने क्यों वापस लिया ये फैसला?

केंद्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 मार्च को अंतिम सुनवाई होने वाली थी। इस दौरान कोर्ट घटना से जुड़े फोटो और वीडियो देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर एनएसए की धारा लगाई थी।

मंत्रालय ने अपने आदेश में बताया कि यह फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया है। आगे बताया गया है कि इसके लिए लद्दाख में अगल-अलग समुदायों और नेताओं से लगातार संपर्क बनाए हुए है। आदेश में यह भी कहा गया कि उस दौरान हुई हड़ताल और विरोध प्रदर्शन की वजह से छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यापार, पर्यटक और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा था। क्षेत्र की चिंताओं को दूरस्त करने के लिए हाई-पावर्ड कमेटी के माध्यम से बातचीत जारी रहेगी।

Created On :   14 March 2026 4:48 PM IST

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