UP News: इलेक्शन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव पर अखिलेश यादव का बयान आया सामने, कहा- 'लूट मची है...'

इलेक्शन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव पर अखिलेश यादव का बयान आया सामने, कहा- लूट मची है...
अखिलेश यादव की तरफ से आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग किसी की सुन नहीं रहा है। यूपी में हुए उपचुनाव को लेकर कहा है कि यहां पर लूट मची है।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के संबंधित विपक्ष के प्रस्ताव पर सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि वे विपक्ष के साथ हैं क्योंकि चुनाव आयोग सुन ही नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में लूट मची हुई थी, प्रशासन के लोगों ने पूरा चुनाव लूट लिया था। सब कुछ कैमरे में कैद था लेकिन सोचिए उस वक्त भी चुनाव आयोग क्या कर रहा था। पुलिस को लेकर भी अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है।

क्या बोले अखिलेश यादव?

सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा है कि पुलिस ने ड्रेस बदलकर वोट डाले हैं। हमें तो वो भी जानकारी दी गई है कि डीएम और एसपी ने कुछ पैसे लिए थे। हम ये बात लोकसभा में भी उठाएंगे कि किस तरह से एक डीएम और एसपी ने पैसे लेने के बाद भी चुनाव का परिणाम बदल दिया था। चुनाव के रिजल्ट्स को सरकार के पक्ष में दे दिया था।

कांशीराम जयंति को लेकर क्या बोले सपा चीफ?

अखिलेश यादव ने कांशीराम जयंति में राहुल गांधी के शामिल होने वाले सवाल पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि हमें खुशी है कि बहुजन की आवाज और मजबूत होती जा रही है। इंडिया गठबंधन मिलकर काम कर रहा है। बहुत ही ज्यादा अच्छी बात है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दल बहुजन की आवाज जनता तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि जब से ये पार्टी आई है, संविधान की धज्जियां उड़ गई हैं।

ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का पेश हुआ प्रस्ताव

विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को पक्षपात और भेदभाव करने के साथ अन्य आरोपों को लेकर पद से हटाने का प्रस्ताव लाने से संबंधित नोटिस को संसद के दोनों सदनों में सौंप दिया है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 130 लोकसभा सदस्यों और 63 राज्यसभा सदस्यों ने नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसमें से इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों के सदस्य शामिल हैं। बता दें, नियमों के अनुसार लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला नोटिस औ राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर नोटिस देना होता है।

Created On :   13 March 2026 6:45 PM IST

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