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भारत-चीन की सीमा को लेकर अजीत डोभाल -यांग जिएची की बैठक

December 22nd, 2017 10:59 IST
भारत-चीन की सीमा को लेकर अजीत डोभाल -यांग जिएची की बैठक

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। भारत और चीन सीमा के मुद्दे पर शुक्रवार को विशेष प्रतिनिधियों की वार्षिक बैठक आयोजित हो रही है। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और स्टेट काउंसिलर यांग जिएची के बीच सीमा विवाद पर बातचीत होनी है। बता दें कि ये मुलाकात भारत-डोकलाम सीमा पर विवाद के लगभग चार महीने बाद हो रही है। 2003 में स्पेशल रिप्रेसेंटेटिव (एसआर) तंत्र बनने के बाद विशेष प्रतिनिधियों के बीच होने वाली यह 20वीं बैठक है।

जानकारी के अनुसार, अजीत डोभाल और यांग जिएची के बीच 4 हज़ार किलोमीटर लंबे बॉर्डर पर शांति बहाल करने के लिए बातचीत होनी है। दोनों प्रतिनिधि डोकलाम स्टैंड-ऑफ पर भी चर्चा करेंगे। इससे पहले सितंबर में ज़ियामेन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोवाल और जिएची ने मुलाकात की थी। बता दें कि भारत-चीन-भूटान तिराहा के पास स्थित डोकलाम क्षेत्र में वर्ष की शुरुआत में भारत और चीन के सैनिकों के बीच लंबा विवाद चला था।

इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक के दौरान डोकलाम मामले पर चर्चा हुई थी। जिसके बाद इस बैठक का आयोजन किया गया। जिसका जिम्मा अजीत डोभाल के ऊपर है। मंगलवार को, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनिंग ने एक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा था कि डोकलाम स्टैंड-ऑफ ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक बड़ी परीक्षा की थी। हुआ ने यह भी बल दिया कि इस तरह की स्थिति को दूर करने के लिए संघर्ष से सबक सीखा जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि "विशेष प्रतिनिधियों की यह बैठक न केवल सीमा के मुद्दे के लिए एक उच्च स्तरीय चैनल है, बल्कि सामरिक संचार के लिए मंच भी है।" इससे पहले डोभाल की बीजिंग में चीन के स्टेट काउंसलर यांग जिएची से काफी सख्त लहजे में बातचीत हुई थी। यांग ने डोभाल से सीधा सवाल किया था कि क्या यह आपकी जगह है? जिस पर अजीत डोभाल ने भी बड़ी बेबकी से जवाब दिया था कि क्या हर विवादित क्षेत्र चीन का हो जाता है?

डोकलाम विवाद के बाद से ही भारत और चीन के बीच रिश्तों में खटास बनी हुई है। पिछले महीने ही चीन और भारत के अधिकारियों ने बीजिंग में भारत-चीन मामलों पर परामर्श व समन्वय कार्यतंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) के 10वें चरण में सीमा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की थी। ये विवाद सड़क बनाने को लेकर ही शुरू हुआ था। भारतीय सेना के दल ने चीन के सैनिकों को इलाके में सड़क बनाने से रोका था। जिस पर चीन दावा कर रहा था कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है। चीन का दावा है कि ये इलाका उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। वहीं भारत इसे अपना हिस्सा बता रहा है।

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