comScore

दुनियाभर में 18 मई को मनाई गई बुद्ध जयंती


डिजिटल डेस्क। बुद्ध पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो कि 18 मई को दुनियाभर में धूमधाम से मनाई गई। इस दिन ही तथागत गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। वैदिक ग्रंथों के अनुसार भगवान बुद्ध नारायण के अवतार हैं। दुनिया के कई हिस्सों में मनाई जाने वाली बुद्ध जयंती का भारत में खासा महत्व है। दरअसल भारत के सन्यासी राजा सिद्धार्थ गौतम के जरिए बौद्ध धर्म की नींव रखी गई थी, जिसे आज पुरी दुनिया में जाना जात है। 

बुद्ध जयंती इकलौता ऐसा धर्म है जिसने देश के बाहर कदम रखा, इतना ही नहीं भारत में जन्में इस धर्म को बहुसंख्या में विदेशियों ने अपनाया है। आज के वक्त में भारत के अलावा ऐसे कई देश हैं जहां बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। बता दें बौद्ध धर्म विश्व के प्राचीन धर्मों में से एक है। आज बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में 50 करोड़ से अधिक लोग इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार हैं। अतः हिन्दुओं के लिए भी ये दिन पवित्र माना जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा: तिथि और शुभ मुहूर्त

तिथि प्रारंभ: 18 मई 2019 को सुबह 04 बजकर 10 मिनट से

तिथि समाप्‍त: 19 मई 2019 को सुबह 02 बजकर 41 मिनट तक

दान का है बड़ा महत्व
बुद्ध पूर्णिंमा एक ऐसा दिन होता है जब आप दान-पुण्य करके अपनी किस्मत को चमका सकते हैं। बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म मानने वालों का सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दिन बौद्ध धर्म को मानने वाले कई तरह के समारोह आयोजित करते हैं। दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयायी इसे अपने अपने तरीके से मनाते हैं। कहा जाता है कि अगर बुद्ध पूर्णिमा के दिन धर्मराज के निमित्त जलपूर्ण कलश और पकवान दान किए जाएं तो सबसे बड़े दान गौ दान के बराबर फल मिलता है। 

बुद्ध के उपदेश
भगवान बुद्ध ने बताया है कि केवल मांस खानेवाला ही अपवित्र नहीं होता, बल्कि क्रोध,व्यभिचार, छल, कपट, ईर्ष्या और दूसरों की निंदा भी इंसान को अपवित्र बनाती है। मन की शुद्धता के लिए पवित्र जीवन बिताना जरूरी है। यही वजह है कि कुछ लोग बुद्ध पूर्णिमा के दिन पक्षियों को भी पिंजरों से आजाद करते हैं।

मान्यताएं
कहते हैं कि अगर बुद्ध पूर्णिमा के दिन धर्मराज के निमित्त जलपूर्ण कलश और पकवान दान किए जाएं तो सबसे बड़े दान गोदान के बराबर फल मिलता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन पांच या सात ब्राह्मणों को मीठे तिल दान करने चाहिए। ऐसा करने से पापों का नाश होता है। मान्यता ये भी है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन अगर एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चन्द्रमा या सत्यनारायण का व्रत किया जाए, तो जीवन में कोई कष्ट नहीं होता।

करें ये उपाय
बुद्ध पूर्णिमा के दिन सुबह के समय स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इस दिन एक स्टील या चांदी के लोटे में जल भरें और उसमें कच्चा दूध मिश्री और गंगाजल मिलाएं तथा पीपल की जड़ में अर्पण करें। वहीं शाम के समय लक्ष्मी नारायण भगवान को खीर का भोग तुलसी डालकर लगाएं तथा जरूरतमंद लोगों को यह खीर बाट दें। इन उपायों को करने से मन की इच्छा पूरी होगी धन धान्य की वृद्धि के साथ साथ पारिवारिक कलह हमेशा के लिए खत्म होंगे।

कमेंट करें
UpCjH