comScore
Dainik Bhaskar Hindi

चेटी चंड पर्व : भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव

BhaskarHindi.com | Last Modified - March 19th, 2018 18:06 IST

5k
0
0

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भारत देश विभिन्न धर्म, संस्कृति और समुदाय का देश है। यहां पर विविध संस्कृतियों के दर्शन होते हैं। इसीलिए कहा जाता है अनेकता में एकता हिंद की विशेषता। यहां पर हर धर्म, संप्रदाय के लोग सारे त्यौहारों को एक-साथ मिलकर बड़े ही हर्षोल्लास से मनाते हैं। फिर चाहे वो होली हो, दिवाली हो, राखी हो, ईद हो या कोई भी त्यौहार, यह सभी त्यौहार भारत में पूरे जोश के साथ मनाए जाते हैं।

इसी कड़ी में सिंधी समुदाय का पर्व चेटीचंड भी बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान झूलेलाल का जन्मदिन चेटी चंड के रूप में देशभर में मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत सुबह मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन कर और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर की जाती है। इस पर्व के दिन लोग अपनी मन्नत पूरी करते हैं। ऐसे लोग जिनकी मन्नत-मुराद पूरी हो जाती है वे बाराणे (आटे की लोई में मिश्री, सिन्दूर व लौंग) और आटे के दीए बनाकर पूजा कर, उसे जल में प्रवाहित कर देते हैं। इस तरह से लोग ईश्वर को अपनी मुराद पूरी करने के लिए धन्यवाद देते हैं। 

क्यों मनाया जाता है चेटीचंड महोत्सव

चेटीचंड महोत्सव के बारे में बताया जाता है कि सिंध प्रदेश के ठट्ठा नामक नगर में एक मिरखशाह नाम के राजा का राज्य था, जो हिन्दुओं पर अत्याचार करता था। वो हिन्दुओं पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालता था। एक बार उसने धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को सात दिन की मोहलत दी। तब कुछ लोग परेशान होकर सिंधु नदी के किनारे आ गए और भूखे-प्यासे रहकर वरुण देवता की उपासना करने लगे। तब प्रभु का हृदय पसीज गया और उन्होंने मछली के ऊपर दिव्य पुरुष के रूप में अवातार लिया।

फिर भगवान ने सभी भक्तों से कहा कि तुम लोग निडर होकर जाओ मैं तुम्हारी सहायता के लिए नसरपुर में अपने भक्त रतनराय के घर माता देवकी के गर्भ से जन्म लूंगा। बड़े होने पर जब राजा का अत्याचार नहीं घटा तो वरुण देव ने अपने प्रभाव से उसे शरण में आने को मजबूर कर दिया। उसके बाद से ही सभी मिल-जुलकर रहने लगे।

सिंधी समाज द्वारा चेटीचंड धूमधाम के साथ मनाया जाता है। वर्ष भर में जिनकी मन्नत पूरी हुई हो, वे आज के दिन भगवान झूलेलाल का शुक्रिया अदा जरूर करते हैं। साथ ही नई मन्नतों का सिलसिला भी इसी दिन से शुरू हो जाता है। इस दिन केवल मन्नत मांगना ही काफी नहीं, बल्कि भगवान झूलेलाल द्वारा बताए मार्ग पर चलने का भी प्रण लेना चाहिए।

चेटीचंड महोत्सव पर कई स्थानों पर भव्य मेले भरते हैं और शोभायात्रा निकाली जाती है। पूरे विश्व में चैत्र मास की चंद्र तिथि पर भगवान झूलेलाल की जयंती बड़े उत्साह, श्रद्धा एवं उमंग के साथ मनाई जाती है। इस दिन सुबह से ही प्रभात फेरियां निकलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जगह-जगह भंडारे होते हैं। लोग एक-दूसरे को चेटीचंड की बधाई देते हैं। और हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं।

समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दें l

ये भी देखें

app-download