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49 हस्तियों के खिलाफ नहीं चलेगा देशद्रोह का मुकदमा, जांच में नहीं मिले कोई सबूत

49 हस्तियों के खिलाफ नहीं चलेगा देशद्रोह का मुकदमा, जांच में नहीं मिले कोई सबूत

हाईलाइट

  • पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने वाले 49 हस्तियों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलेगा
  • इन हस्तियों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताई थी
  • पुलिस ने मजिस्ट्रेट के आदेश पर इन हस्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी

डिजिटल डेस्क, मजफ्फरपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने वाले 49 हस्तियों के खिलाफ पुलिस ने देशद्रोह का मुकदमा बंद कर दिया है। इस साल की शुरुआत में इन हस्तियों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। मुज़फ़्फ़रपुर के एसएसपी मनोज कुमार सिन्हा ने कहा कि जांच में पता चला है कि इन लोगों पर बुरी नीयत से ये आरोप लगाए गए थे। पुलिस को इन आरोपों में कोई आधार नहीं मिला।

चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सूर्यकांत तिवारी के आदेश पर पिछले सप्ताह 3 अक्टूबर को सदर पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई थी। स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की दायर याचिका के करीब दो महीने बाद मजिस्ट्रेट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। FIR में फिल्म निर्माता मणिरत्नम, अनुराग कश्यप, श्याम बेनेगल, अभिनेता सौमित्र चटर्जी और गायक शुभा मुद्गल सहित 49 हस्तियों पर 'देश की छवि धूमिल करने, प्रधानमंत्री के प्रभावशाली प्रदर्शन को कम करने और अलगाववादी प्रवृत्तियों का समर्थन करने' का आरोप लगाया गया था।

FIR दर्ज होने के बाद अशोक वाजपेयी, जैरी पिंटो और शम्सुल इस्लाम जैसी 180 हस्तियां सामने आई थी जिन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री को खत लिखना देशद्रोह कैसे हो सकता है? खत में कहा गया, 'हमारे 49 सहयोगियों के खिलाफ केवल इसलिए एफआईआर दर्ज की गई है क्योंकि उन्होंने हमारे देश में मॉब लिंचिंग पर चिंता व्यक्त करके समाज के सम्मानित सदस्यों के रूप में अपना कर्तव्य पूरा किया।' साथ ही सवाल किया गया है कि क्या नागरिकों की आवाज़ को चुप कराने के लिए अदालतों का दुरुपयोग करना 'उत्पीड़न' नहीं है?

बता दें कि 49 हस्तियों में अनुराग कश्यप, अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन, मणि रत्नम और कोंकणा सेन शर्मा जैसे दिग्गज शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए इस पत्र में भारत में भीड़ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई थी। इसमें मुस्लिम, दलित और अन्य समुदायों के खिलाफ भीड़ द्वारा की जा हिंसा (मॉब लिंचिंग) पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

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