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जिनपिंग से मिले PM मोदी, अर्जुन तपस्या स्थली और तट मंदिर के दर्शन, साथ पिया नारियल पानी


हाईलाइट

  • अपने दो दिवसीय दौरे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहुंचे भारत
  • तमिलनाडु गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित ने किया जोरदार स्वागत
  • पीएम मोदी से होगी दूसरी अनौपचारिक मुलाकात
  • कश्मीर मुद्दे पर जिनपिंग कर सकते है पाकिस्तान की पैरवी

डिजिटल डेस्क महाबलीपुरम। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चेन्नई पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की। पीएम ने मामल्लपुरम में जिनपिंग को अर्जुन तपस्या स्थली और तट मंदिर के दर्शन कराए और इन स्थलों का महत्व समझाया। इसके बाद दोनों ने पंच रथ स्थल पर नारियल पानी पिया और अनौपचारिक बातचीत की शुरुआत की। पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को नचियारकोइल-ब्रांच अन्नम लैंप और थंजावुर स्टाइल की पेंटिंग भी गिफ्ट की। चीनी राष्ट्रपति का यह दौरा 48 घंटे का है।

नारियल पानी पीने के बाद पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति 700-728 ईस्वी के दौरान समुद्र के निकट निर्मित शोर मंदिर पहुंचे। यह महाबलीपुरम का प्रमुख तीर्थ स्थान है। मंदिर में तीन स्थल हैं, जिनमें दो भगवान शिव और एक भगवान विष्णु को समर्पित है। शोर मंदिर में विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रसाद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी चीनी राष्ट्रपति ने मुलाकात की। मंदिर के पास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसका पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति ने आनंद लिया। इसके बाद दोनों नेता मंच पर पहुंचे और कलाकारों के साथ तस्वीर खिंचाई। 

दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद साथ में डिनर किया। डिनर में दोनों नेताओं को पारम्परिक दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे गए। दालों से बनाया जाने वाला पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन 'सांभर' के साथ पिसी दाल, विशेष मसालों और नारियल से तैयार की जाने वाली 'अराचु विट्टा सांभर' मेन्यू में आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इसके अलावा टमाटर से बनी थक्‍कली रसम, इमली, कदलाई कुरुमा और मिष्ठान में हलवा समेत विभिन्न व्यंजन परोसे गए। चीनी राष्ट्रपति के लिए चुनिंदा मांसाहारी व्यंजन भी तैयार किए गए थे।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विदेश मंत्री वांग यी और स्टेट काउंसलर यांग जिएची सहित 100 सदस्यीय मजबूत प्रतिनिधिमंडल आया है। चीनी प्रतिनिधमंडल में सीपीसी केंद्रीय कमेटी व राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य डिंग शुईशियांग, स्टेट काउंसलर यांग जिएची, विदेश मंत्री वांग यी, चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस की राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष एचई लाइफेंग व अन्य लोग शामिल हैं।

दोनों दिग्गज अपने इस द्वितीय शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों के साथ वैश्विक मुद्दों और कश्मीर पर भी पर चर्चा कर सकते हैं। विश्व की इन दो शक्तियों के बीच अब तक 14 बार मुलाकात हो चुकी है लेकिन उनके बीच अनौपचारिक मुलाकात सिर्फ एक बार ही हुई है। इससे पहले अनौपचारिक सम्मेलन के लिए मोदी और जिनपिंग अप्रैल 2018 में चीन के वुहान शहर में मिले थेे।

मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने जिनपिंग को महाबलीपुरम के मंदिरों और विश्व धरोहर स्मारकों का दौरा कराया। यूनेस्को ने महाबलीपुरम के स्मारकों के समूह को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) निर्धारित किया है।

लोक नृत्य और लोक संगीत से हुआ स्वागत

राज्यपाल पुरोहित के बाद लोक नर्तकों और लोक संगीतकारों ने भी चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग का अपने सिद्ध पारंपरिक नृत्य चेंदा मेलम और संगीत के साथ स्वागत किया।

तमिलनाडु मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने किया पीएम मोदी का स्वागत

पीएम मोदी ने जिनपिंग के लिए चीनी भाषा में किया ट्वीट

चैन्नई में लैंड करने के बाद पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए चीनी भाषा में ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि 'मैं तमिलनाडु की इस महान भूमि में आकर बहुत खुश हूं, तमिलनाडु अपनी महान संस्कृति और आतिथ्य के लिए जाना जाता है।' उन्होंने कहा कि 'यह बहुत खुशी की बात है कि तमिलनाडु राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी करेगा। मुझे उम्मीद है कि यह अनौपचारिक बैठक भारत-चीन संबंधों को और मजबूत करेगी।'

NAVY और ICG ने तैनात किये वारशिप्स

सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी और जिनपिंग के इस सम्मेलन में नेवी और भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री खतरों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए महाबलीपुरम में तट से कुछ दूरी पर वारशिप्स (जंगी जहाज) तैनात किये हैं। साथ ही यह यात्रा खत्म होने तक तटों पर पानी से जुड़ी स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी रोक दिया गया है।

जिनपिंग करेंगे पाकिस्तान की पैरवी ?

बता दें कि बुधवार को पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने कहा था कि कश्मीर पर हमारी लगातार नजर हैं और चीन, पाकिस्तान के मूल हितों से जुड़े मुद्दों पर उसका समर्थन करेगा। जिनपिंग ने कहा था कि कश्मीर के हालात में सही और गलत क्या है, यह साफ हो चुका है। दोनों ही पक्षों को शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए यह मसला सुलझाना चाहिए।

वहीं चीन की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, इमरान से मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने कहा था कि चीन और पाकि​स्तान की दोस्ती का रिश्ता अटूट है। हम चीन-पाकिस्तान के साझा भविष्य को नए युग में ले जाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। हमारे रिश्तों में हमेशा उत्साह बरकरार रहेगा।

भारत को विकसित होता देख चीन बार-बार भारत के विरोध में और पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है। ऐसे में आज भी चीनी राष्ट्रपति पाकिस्तान की पैरवी कर सकते है।

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