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प्रयागराज : कुंभ मेले में मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान, अखाड़ों ने भी लगाई डुबकी

February 04th, 2019 18:35 IST

हाईलाइट

  • कुंभ मेले का आज मौनी अमावस्या पर दूसरा प्रमुख शाही स्नान
  • मध्यरात्रि से डुबकी लगाने श्रद्धालुओं की भीड़ संगम के घाटों पर पहुंची
  • अखाड़ों ने भी शाही डुबकी लगाई, प्रत्येक अखाड़े को 40 मिनट का समय

डिजिटल डेस्क, प्रयागराज। कुंभ मेले में सोमवार को मौनी अमावस्या पर महास्नान का पर्व शुरू हो गया है। यह दूसरा शाही स्नान है, जिसके लिए मध्यरात्रि से डुबकी लगाने श्रद्धालुओं की भीड़ संगम के घाटों पर पहुंच गई। यहां श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाने के साथ ही इस महापर्व की शुरुआत की, बता दें कि पहला शाही स्नान कुंभ के शुरुआती दिन मकर संक्रांति पर हुआ था। वहीं मौनी अमावस्या पर शाही स्नान का दुर्लभ योग पूरे 71 वर्ष बाद बना है। मान्यता है कि इस दिन ब्रम्ह मुहूर्त में मौन रहकर डुबकी लगाने पर अनंत फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी पूरी आस्था के साथ इस पुण्य का लाभ लेते दिखाई दिए। 

अदभुत योग
वर्ष 2019 की पहली सोमवती अमावस्या और अर्ध कुंभ के शाही स्नान का अदभुत योग इस बार बना है। दूसरे शाही स्नान पर सोमवती व मौनी अमावस्या पर महादेय एवं सर्वार्थसिद्धि योग का महासंगम है। यह दुर्लभ योग 71 साल बाद कुंभ में बना है। इस बार इस योग में त्रिवेणी संगम में स्नान, दानपुण्य करने से राहु, केतु, शनि से संबंधित कष्टों से मुक्ति मिलेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग की भी निष्पत्ति हो रही है। साधारण रूप से भी यह विशेष होती है किन्तु इस बार अर्धकुम्भ होने से इसका महत्त्व और भी बढ़ गया है। इस दिन तीर्थ में स्नान,तप, व्रत और दान करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 

विशेष महत्व
पद्मपुराण में कहा गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं। विशेषकर मौनी अमावस्या को किया गया गंगा स्नान का विशेष महत्व का माना गया और इस बार तो अर्धकुम्भ जो महायोग है। मौनी अमावस्या का यह व्रत व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखना सिखाता है। शास्त्रों में वाणी को नियंत्रित करने के लिए इस दिन को सबसे शुभ बताया गया है। मौनी अमावस्या को स्नान के बाद मौन व्रत रखकर जाप करने से मन की शुद्धि होती है। कुंभ मेले का शाही स्नान मौनी अमावस्या का भी होता है।

इस दिन अमावस्या तिथि सूर्योदय से शुरु हुई, जो पूरे दिन रहेगी। इस दिन श्रवण नक्षत्र, वियातिपाद योग, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ सोमवार होने से महायोग का निर्माण हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार कुंभ आरंभ होने की मूल तिथि भी यही है इसमें स्नान करने से मनुष्य पूर्णता की प्राप्ति करता है, वहीं अपने पूर्वजों को स्नानदान कर मोक्ष की गति दिलाता है।  


 

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