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एमबीबीएस में घटीं ओपन कैटेगरी की सीटें

एमबीबीएस में घटीं ओपन कैटेगरी की सीटें

डिजिटल डेस्क, नागपुर। प्रदेश में जारी एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया में ओपन कैटेगरी की सीटें घटाने के राज्य सरकार के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में परिमल बालंखे और अन्य चार अभ्यर्थियों ने रिट याचिका दायर कर सरकार के फैसले को अवैध बताया है। दावा है कि, शैक्षणिक सत्र 2019-20 की प्रवेश प्रक्रिया में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए ओपन कैटेगिरी की 259 सीटें घटा दी गई हैं। याचिका में पिछले शैक्षणिक सत्र 2018-19 की ही तरह एमबीबीएस में ओपन कैटेगिरी की 1,134 सीटें रखने के आदेश जारी करने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की गई है।  मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी राज्य चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमईआर), मानव संसाधन विकास मंत्रालय व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से एड. श्रीरंग भंडारकर ने पक्ष रखा। एड. मनीष शुक्ला ने उन्हें सहयोग किया। 

ईडब्ल्यूएस, मराठा आरक्षण लागू हुआ 

12 जनवरी 2019 को केंद्रीय सामाजिक न्याय व विधि विभाग ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया। इसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालाय, केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी नोटिफिकेशन जारी कर इसे सभी पाठ्यक्रमों में लागू किया। मेडिकल काउंसिल ने भी चिकित्सा पाठ्यक्रमों में इसे अपनाया। महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट सेल ने जब  शैक्षणिक सत्र  2019-20 की प्रवेश प्रक्रिया की घोषणा की और सूचना पत्रक जारी किया तो इसमें ओपन कैटेगिरी की सीटें घटाई हुई मिलीं। याचिकाकर्ता के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2018-19 में प्रदेश के 23 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस की  3,110 सीटें थीं। इसमें ओपन कोटे के विद्यार्थियों के लिए कुल 1,134 सीटें उपलब्ध थीं।  शैक्षणिक सत्र  2019-20 में राज्य में ईडब्ल्यूएस और मराठा (एसईबीसी) आरक्षण लागू हुआ। एक शासकीय मेडिकल कॉलेज भी बढ़ा, तो एमबीबीएस की सीटें बढ़कर 4,080 सीटें कर दी गईं। याचिकाकर्ता के अनुसार इसमें से महज 8,75 सीटें ही ओपन कैटेगिरी के विद्यार्थियों के लिए रखी गई हैं। यानी सीटें बढ़ाने के बावजूद ओपन कैटेगिरी के विद्यार्थियों की 259 सीटें कम कर दी गई हैं। सरकार का यह फैसला ओपन कैटेगिरी के विद्यार्थियों के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में मामला अब हाईकोर्ट की शरण में है। 

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