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आपको हर पीड़ा से बचायेंगे तुलसीदास जी द्वारा बताए गए ये सात गुण

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 06th, 2018 17:00 IST

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आपको हर पीड़ा से बचायेंगे तुलसीदास जी द्वारा बताए गए ये सात गुण

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने स्वभाव के अनुरूप ही कार्य करता है। जैसे संकट के समय वह दुखी होता है, खतरे की स्थिति हो तो वो डरता है और परिस्थितियां उसके अनुकूल हों तो स्वाभाविक है वो सुखी और संतुष्ट रहेगा। हर कोई व्यक्ति अपने जीवन में खुश रहना चाहता है, वह अपने जीवन को शांति से व्यतीत करना चाहता है। जीवन में कोई नहीं चाहता कि दुःख ​का समय उसके सामने आए। लेकिन उसके चाहने या ना चाहने से कुछ नहीं होता। 

खुशियां या आनंद लेना तो अच्छी बात है लेकिन दुःख और परेशानियों का शोक करने से हम और कमजोर होते जाते हैं। शोक से दूर होने के लिए हमारे शास्त्र और पौराणिक ग्रंथ हमें आत्मबल प्रदान करने का काम करते हैं और उनमें अंकित आदर्शों का हमें अनुसरण करना चाहिए। 

गोस्वामी तुलसीदास जी के एक दोहे में आपको अपनी हर समस्या का समाधान मिल सकता है। इसमें 7 ऐसे गुणों की बात कही गई है जो हर व्यक्ति के चरित्र में उपस्थित हैं व्यक्ति को किसी भी संकट से घबराना नहीं चाहिए। विश्वास करें कि कोई भी पीड़ा उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती।

दोहा इस प्रकार है...
तुलसी साथी विपत्ति के विद्या, विनय, विवेक। साहस सुकृति सुसत्याव्रत राम भरोसे एक।।

भावार्थ...
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखित इस दोहे में कहा गया है कि जिस व्यक्ति के पास विद्या, विनय, विवेक, साहस, सदकर्म, सच और ईश्वर का साथ होता है उसे किसी भी परस्थिति में भयभीत नहीं होना चाहिए। 

आइए जानें कैसे ये गुण व्यक्ति के लिए रक्षक बन सकते हैं?

1- पहला गुण हैं विद्या यानि ज्ञान, जिसके पास यह विशेष गुण होता है वह अपनी बुद्धिमता से किसी भी कष्ट से मुक्त होने का उपाय निकाल लेता है। उसे कोई भी दुःख हरा नहीं पाता है। वो दुखों का समाधान निकालने में सक्षम होता है।

2- दूसरा गुण है विनय यानि अच्छा व्यवहार, विनम्रता का गुण। यदि आप दूसरों के लिए विनम्र रहते हैं तो शत्रु भी आपके मित्र बन जाते हैं। आपको कष्ट में डालने से पहले या आपके लिए षड्यंत्र करने से पहले वो दस बार सोचता है। साथ ही यदि आप किसी आपदा में हैं भी तो आपका ये गुण अन्य लोगों को आपकी सहायता करने के लिए विवश कर देता है।

3- तीसरा गुण है विवेक या बुद्धि, जो व्यक्ति सोचने-समझने की शक्ति रखता है, जिसमें यह क्षमता है कि वह कभी-भी अपने लिए विपदा खड़ी नहीं होने देता। वह अपनी बुद्धिमता से पहले से ही परस्थितियों का अनुमान लगाकर उससे मुक्त होने का प्रयत्न करने लगता है, इसलिए उसे कोई समस्या घेर नहीं पाती।

4- चौथा गुण है साहस, यह एकमात्र ऐसा गुण है जो किसी भी व्यक्ति को कठिन से कठिन परिस्थिति में भी हार मानने नहीं देता। इसके आधार पर वह बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को पार कर लेता है।

5- पांचवा गुण है सुकृति यानि अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को सदा शुभ फल मिलता है, ईश्वर भी उसका साथ देता है। जिसने कभी किसी का बुरा नहीं किया, जो सदा दूसरों के हित की सोचता है, उसे इसका शुभ परिणाम भले देर ही सही पर मिलता अवश्य है।

6- छठवा गुण है सुसत्याव्रत यानि सच बोलने की आदत यह आदत व्यक्ति को सहज रूप से खुला रखती है, उसके पास गुप्त रखने के लिए कुछ नहीं होता, इसलिए वह दुनिया के सामने जैसा है वैसा ही रहता है। यह उसके लिए प्रतिकूल परिस्थितियां नहीं बनने देता और अनेक प्रकार के दुखों से पहले ही बचा लेता है।

7- सातवा गुण है राम भरोसे एक यानी ईश्वर के प्रति आस्था जिसे भी ईश्वर के प्रति आस्था है उसको यह आदत हर मुश्किल से बचाती है। जब आप किसी ऐसी स्थिति में हों जहां से निकलना मुश्किल पड़ जाए तो सिर्फ ईश्वर के प्रति आपका विश्वास ही उसको बचाता है और उसे सही मार्ग पर ले जाता है।

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