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खून का रंग करना चाहता था सफेद, जानें दशानन के अधूरे सपने

September 28th, 2017 11:54 IST
खून का रंग करना चाहता था सफेद, जानें दशानन के अधूरे सपने

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रावण... महाज्ञानी, महापंडित, वेदों का ज्ञाता, शास्त्र और संगीत का जानकर। ऐसा कहा जाता है कि उसकी तरह शास्त्रों का प्रखर विद्वान व पराक्रमी आज तक दूसरा नहीं हुआ। वीणा बजाने में उसे महारथ हासिल था। इसे वह प्रायः भगवान शिव की भक्ति के समय बजाता था। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि वीणा की आवाज स्वयं शिव काे मोहित कर लेती थी। उसके तप और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे रावण नाम से संबोधित किया था। उसे लंकेश, दशानन, लंकापति आदि नामों से भी जाना जाता है। आज हम आपको यहां रावण के ऐसे स्वप्नों (सपनों) के बारे में बताने जा रहे हैं जो अधूरे रह गए। जीवन पर्यंत वह इन्हें पूर्ण नहीं कर पाया...

  • रावण रक्त के लाल रंग को सफेद करना चाहता था। अनेक युद्धों में उसने हजारों निर्दोषों का रक्त बहाया था। वह चाहता था जिससे धरती लाल हो गई थी। वह यह रंग सफेद करना चाहता था, जिससे जल के साथ मिलकर वह अपने पापों को छिपा सके। 
  • शास्त्रों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि रावण का रंग काला था, इसलिए वह चाहता था कि मानव जाति में जितने भी लोगों का रंग काला है वह सफेद हो जाए, ताकि कोई भी महिला उनका अपमान न कर सके। 
  • रावण पराक्रमी था लेकिन वह बाली को कभी जीत नहीं सका। बाली रावण को बाजू में दबाकर समुद्रों की परिक्रमा किया करता था। बाल से युद्ध में हारने के बाद उसे बच्चाें ने पकड़कर घोड़ों के साथ अस्तबल में बांध दिया था। बाली को जीतने का उसका सपना कभी पूर्ण नहीं हो सका।
  • रावण सोने की लंका में रहता था जिसे उसने भगवान शिव वे दक्षिणा में मांग लिया था। इसके बाद भी उसकी सोने की भूख समाप्त नहीं हुई। वह सोने में खुशबू डालना चाहता था, जिससे कि सोना खोजने में परेशानी का न हो। जहां भी सोना हो उसे खुशबू आ जाए। 
  • रावण महाज्ञानी था लेकिन मदिरा का सेवन उसे अत्यंत प्रिय था। कहा जाता है कि उसे मदिरा इतनी प्रिय थी कि वह उसकी दुर्गंध दूर करना चाहता था, ताकि उसका और आनंद लिया जा सके।
  • रावण स्वर्ग में सीढ़िया बनाना और समुद्र के पानी को मीठा करना चाहता था। जिससे लोग भगवान को छोड़कर उसी की आराधना करें। वह संपूर्ण प्रकृति में अपना आधिपत्य करना चाहता था। 
     
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