UP News: सपा चीफ पर योगी सरकार के मंत्री ने साधा निशाना, कहा नाम पिछड़ा है काम पिछड़ा विरोधी है

सपा चीफ पर योगी सरकार के मंत्री ने साधा निशाना, कहा नाम पिछड़ा है काम पिछड़ा विरोधी है
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव को लेकर कहा, पिछड़े का बेटा अगर शिक्षा मंत्री है तो इन्हें क्या दर्द है अगर अधिकारियों की गलती थी तो अधिकारियों को हटाया गया।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तरप्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव है। युवाओं के विरोध प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी हमले जारी है। चुनाव को देखते हुए सत्तारूढ़ सरकार के मंत्री सपा चीफ अखिलेश यादव पर निशाना साध रहे है।

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव के बयान पर ANI पर बातचीत करते हुए कहा अखिलेश यादव का उद्देश्य पिछड़े वर्ग के शिक्षा मंत्री को हटाना था और कुछ उद्देश्य नहीं था। धर्मेंद्र प्रधान के पास कोई और आरोप नहीं है। मंत्री ने आगे कहा उन्हें लंबे समय तक का अनुभव है पिछड़ों के नेता है और इनका एक उद्देश्य है नाम पिछड़ा है इन लोगों का काम पिछड़ा विरोधी है। निषाद ने आगे कहा पिछड़े का बेटा अगर शिक्षा मंत्री है तो इन्हें क्या दर्द है अगर अधिकारियों की गलती थी तो अधिकारियों को हटाया गया।

पहले की सपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा शिक्षा माफिया तो इनके समय में ज्यादा थे। ये लोग पिछड़ों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और पिछड़ों के बेटों को शिक्षा मंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं। शिक्षा पिछड़ों के हाथ में न रहे और देश की व्यवस्था पिछड़ों के हाथ में न रहे और पीएम मोदी चाहते हैं कि पिछड़ों को भी अवसर मिले और जो पहले से वंचित हैं उन्हें अवसर दिया जाए और ये चाहते हैं कि इन्हें अवसर न मिले।

आपको बता दें सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम दावे किए जा रहे है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नींव यूजीसी की नई गाइडलाइन्स के वक्त ही पड़ गई थी, यूजीसी ने देश के महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में एससी एसटी की तरह ही ओबीसी वर्ग के छात्रों के हित में कुछ निर्देश जारी किए थे। इसे लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों में काफी निराशा देखने को मिली। सामान्य वर्ग के छात्र विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरें। लेकिन उस वक्त बीजेपी सरकार ने प्रधान को जैसे तैसे संरक्षण प्रदान दिया। तब से सामान्य वर्ग भी चाहता था शिक्षा मंत्री प्रधान को इस्तीफा होना चाहिए। जंतर-मंतर के प्रदर्शन में भले ही प्रत्यक्ष तौर पर वो शामिल हो या ना हो , लेकिन अप्रत्यक्ष तरीके से इन स्टूडेंट ने विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा देने और सरकार को झुकने के लिए मजबूर किया गया। यानी एक तरह से तब हारे उन स्टूडेंट की जीत हुई।

ओबीसी वर्ग से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री रहते हुए यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नियुक्तियों में लगने वाले सबसे अधिक आरोप नो फाउंड स्यूटेबल को सही करने में,आरक्षित पदों को भरने अथार्त पूर्व के बैकलॉग को खत्म करने की दिशा में कुछ कार्य किए। ओबीसी के लिए यूजीसी गाइडलाइंस बनवाई। अब उनका इस्तीफा हो गया है, अब सबसे बड़ा सवाल ये है क्या शिक्षा मंत्री रहते हुए प्रह्लाद जोशी इस प्रधान के कार्यों को पूरा करेंगे।

Created On :   26 July 2026 3:57 PM IST

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