Bengal Assembly Election: सीएम पद से इस्तीफा न देने पर अड़ीं ममता क्या बीजेपी सरकार के रास्ते में बनेंगी रोड़ा? जानकारों से समझें क्या हैं विकल्प और कितने दिन टिकेगी ये जिद

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव नतीजों के बाद इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया। मंगलवार को कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। उनके इस बयान के बाद राज्य में संवैधानिक संकट जैसी स्थिति बनने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, संवैधानिक विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का मानना है कि इससे सरकार गठन की प्रक्रिया पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और आगे की कार्रवाई संविधान के मुताबिक ही होगी।
इस्तीफे से इनकार, बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममता बनर्जी से पूछा गया कि क्या वे राजभवन जाकर इस्तीफा देंगी, तब उन्होंने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नैतिक रूप से उनकी जीत हुई है और वे इस्तीफा नहीं देंगी। ममता ने इलेक्शन कमिशन ऑफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि उनका मुकाबला बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे पार्टी नेताओं के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगी और बीजेपी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन भी करेंगी।
संवैधानिक संकट पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ममता के इस रुख के बाद संवैधानिक संकट की चर्चा शुरू हो गई है। आजतक ने वरिष्ठ वकील Shekhar Naphade के हवाले से बताया है कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करती हैं तब राज्यपाल के पास उन्हें बर्खास्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जनादेश जारी किए जाने के बाद मुख्यमंत्री को उसका पालन करना होता है। जब तक कोई अदालत इस पर रोक नहीं लगाती। तब तक मौजूदा जनादेश ही मान्य रहेगा।
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राज्यपाल की भूमिका और संवैधानिक प्रावधान
विशेषज्ञों के अनुसार अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दे सकते हैं। अगर इसके बाद भी वे मना करती हैं, तो राज्यपाल उन्हें पद से हटा सकते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री राज्यपाल की कृपा पर ही पद पर बने रहते हैं। इस आधार पर राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
विधानसभा कार्यकाल और आगे की प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में कार्यकाल खत्म होने के बाद मौजूदा सरकार स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
आजतक से संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने कहा कि अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं भी देती हैं, तब भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल नई विधानसभा के गठन के बाद नए मुख्यमंत्री को शपथ दिला सकते हैं। भले ही मौजूदा मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया हो या नहीं।
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चुनाव को चुनौती देने का विकल्प
पीडीटी आचार्य ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी के पास चुनाव परिणाम को चुनौती देने का अधिकार है। लेकिन यह केवल ‘इलेक्शन पिटीशन’ के जरिए ही संभव है। इसकी सुनवाई बाद में होगी और इससे तत्काल सरकार गठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वे मतदाता सूची (SIR) से नाम हटाए जाने जैसे मुद्दों पर चुनाव को चुनौती दें, फिर भी वे 7-8 मई के बाद मुख्यमंत्री पद पर बनी नहीं रह सकतीं।
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