मध्य प्रदेश न्यूज: 2 लाख सफाई कर्मियों के हक की लड़ाई, दिवाली पर गंदगी को लेकर कांग्रेस का हमला

2 लाख सफाई कर्मियों के हक की लड़ाई, दिवाली पर गंदगी को लेकर कांग्रेस का हमला
मध्य प्रदेश के करीब 2 लाख सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता ने कहा कि ये वो समाज है जो पूरे शहर और गांव को स्वच्छ रखता है।

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के करीब 2 लाख सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता ने कहा कि ये वो समाज है जो पूरे शहर और गांव को स्वच्छ रखता है, लेकिन दिवाली के समय भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कचरा गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं, ये पूरे प्रदेश के हाल हैं।

उन्होंने कहा, "एक तरफ मोदी जी कुंभ के समय वाल्मीकि समाज के पैर धोकर आशीर्वाद ले रहे हैं, तो मैं भाजपा और मोदी जी से जानना चाहता हूं कि क्या ये पैर धोना ढोंग था?"

5 घटनाओं में 8 मौतें, सरकार चुप

कांग्रेस नेता ने बताया कि प्रदेश में सीवर सफाई के दौरान 5 घटनाएं घटीं, जिसमें 8 मौतें हुईं और 4 घायल हुए। ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में ड्रेनेज लाइन में उतरने पर दम घुटने से मौत हुई। उज्जैन में तो मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही एक की मौत हुई और दो गंभीर रूप से घायल हुए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने सफाई कर्मियों के लिए आज तक कोई नीति नहीं बनाई। मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 की धारा 7 के तहत सफाई कर्मियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने कभी नहीं सोचा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीवर लाइन की सफाई में मौत पर 30 लाख रुपये मिलने चाहिए, लेकिन मप्र सरकार 2 लाख, 3 लाख, 4 लाख देती है और वो भी सभी को नहीं। कई लोगों के नाम हटा दिए जाते हैं ताकि नगर निगम कमिश्नर और सीएमओ पर जवाबदारी न आए।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी नीति नहीं

उन्होंने बताया कि 2025 में जबलपुर हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सफाई कर्मियों के लिए नीति बननी चाहिए। 1 सितंबर 2026 को सरकार डबल बेंच में गई, लेकिन अपील खारिज हो गई। हाईकोर्ट ने कहा कि इनके लिए नीति बने और 10 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे कर्मियों का नियमितीकरण हो।

आउटसोर्स में कमीशनबाजी का आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश के हर विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों को रखा जा रहा है और उद्यमिता विकास केंद्र के नाम पर नौकरी रखने के लिए एक-एक व्यक्ति से 40-50 हजार से 1 लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं। कई लोगों ने शपथ के रूप में जानकारी दी है, जिसे विधानसभा में उठाया जाएगा।

9 हजार में परिवार कैसे चले?

उन्होंने कहा कि सरकार सफाई कर्मियों को नियमित नहीं करना चाहती, 25 हजार रुपये नहीं देना चाहती। 9 हजार रुपये में इस महंगाई में एक वाल्मीकि परिवार अपने बच्चे को अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ाएगा, राशन कैसे भरेगा, मकान का किराया कैसे देगा?

उन्होंने सवाल उठाया, "अगर आप कचरा नहीं उठाएंगे तो दिवाली पर शहर में जो कचरा हो रहा है, उसे कौन उठाने आएगा? क्या नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी आएंगे, क्या मुख्यमंत्री जी आएंगे?"

मांगें

  • सरकार मुआवजे को लेकर नीति स्पष्ट करे
  • तत्काल सफाई कर्मियों से संवाद करे
  • ठेका प्रथा और आउटसोर्स व्यवस्था तत्काल बंद हो
  • नियुक्ति के नाम पर कमीशनबाजी बंद हो
  • सीवर लाइन में मौत पर परिवार के सदस्य को नौकरी मिले
  • 10 साल से अधिक सेवा वालों का नियमितीकरण हो

अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में पत्र भी लिखा है। बगैर साफ-सफाई के कोई त्योहार नहीं बनता। सरकार अपने दिल और दिमाग की गंदगी निकाले और सफाई कर्मचारियों से बात करे, ताकि दिवाली पर जनता को भी खुशी हो और उस परिवार को भी खुशी हो जो मांग कर रहा है।

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