Bihar News: बेटी की शादी में शामिल हो सकेंगे अनंत सिंह, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई सरेंडर की तारीख

बेटी की शादी में शामिल हो सकेंगे अनंत सिंह, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई सरेंडर की तारीख
बाहुबली नेता और जेडीयू विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को बड़ी राहत मिल गई है। अदालत ने दुलार चंद यादव हत्याकांड के आरोपी अनंत सिंह को आत्मसमर्पण के लिए समय सीमा बढ़ा दी है।

डिजिटल डेस्क, पटना। बाहुबली नेता और जेडीयू विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को बड़ी राहत मिल गई है। अदालत ने दुलार चंद यादव हत्याकांड के आरोपी अनंत सिंह को आत्मसमर्पण के लिए समय सीमा बढ़ा दी है। अब उन्हें 4 दिसंबर, 2026 को सरेंडर करना होगा। इससे पहले अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया था। अब वह 25 नवंबर को अपनी बेटी की शादी में शामिल हो सकेंगे।

वकील ने SC में दी ये दलील

अनंत सिंह की तरफ से उनके वकील सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान उन्होंने दलील दी कि 25 नवंबर, 2026 को उनकी बेटी शिवांगी सिंह की शादी है। परिवार में मांगलिक कार्यक्रम और विवाह की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए सरेंडर के लिए कुछ और समय देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस दलील पर विचार किया और उन्हें अतिरिक्त समय देने की मंजूरी दे दी।

इस निर्णय के बाद अनंत सिंह अपनी बेटी की शादी और उससे जुड़े रीति-रिवाजों में शामिल हो सकेंगे। उन्हें 4 दिसंबर, 2026 तक संबंधित जांच अधिकारी या अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।

SC ने खारिज की थी जमानत याचिका

गौरतलब है कि यह मामला अक्टूबर 2025 में हुए दुलार चंद यादव हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। इस केस में अनंत सिंह को आरोपी बनाया गया है। पटना हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया था। हालांकि, पीड़ित परिवार की तरफ से दुलार चंद यादव के पोते ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को फिलहाल निलंबित कर दिया था। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और उनके खिलाफ दर्ज करीब 67 आपराधिक मामलों की पृष्ठभूमि पर उचित तरीके से विचार नहीं किया था।

अदालत ने बिहार पुलिस को जारी किए थे ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस और संबंधित जांच अधिकारी को इस हत्याकांड मामले की पड़ताल पूरी करने के लिए 4 महीने का समय दिया है। साथ ही पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के भी सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस अवधि के बाद मामले में दोबारा सुनवाई की जाएगी।

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