विधानसभा चुनाव 2027: विधायक बने बिना मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे यूपी के 7 नेता, क्या इस बार फिर रिपीट होगा ये फॉर्मूला?

विधायक बने बिना मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे यूपी के 7 नेता, क्या इस बार फिर रिपीट होगा ये फॉर्मूला?
UP चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने खुद विधानसभा चुनाव लड़ने पर रुख साफ किया है। जानिए, उनसे पहले कौन-कौन से नेता बिना विधायक बने मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सरगर्मी के बीच सपा चीप अखिलेश यादव ने खुद चुनाव लड़ने को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री तभी बनते हैं, जब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते। इसलिए इस बार भी वही करेंगे, जो उनके लिए शुभ रहा है। अखिलेश ने 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि तब वे लोकसभा सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे और इस बार भी सीधे शपथ लेने पहुंचेंगे।



अखिलेश के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि वे किसी एक विधानसभा सीट तक सीमित रहने के बजाय पूरे प्रदेश में सपा और पीडीए के पक्ष में प्रचार करना चाहते हैं। साथ ही चुनाव में बहुमत मिलने के बाद सरकार बनने पर वे विधान परिषद या उपचुनाव के जरिए सदन की सदस्यता ले सकते हैं। अखिलेश के बयान से ये साफ मालूम चलता है कि वो विधानसभा चुनाव में चुनाव नहीं लड़ना चाहते बल्कि सीएम कुर्सी मिलने पर विधान परिषद में सदस्यता लेने के मूड में है।

आपको बता दें यूपी की राजनीति में बिना विधानसभा चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनने की परंपरा कोई नई नहीं है, ये परंपरा पुरानी है। यूपी में कई सीएम ऐसे ही बने,आजादी के बाद यूपी का सियासी इतिहास खंगालने पर पता चलता है कि त्रिभुवन नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने, लेकिन उपचुनाव हारने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मायावती दो बार राज्यसभा सांसद रहते मुख्यमंत्री बनीं और बाद में विधान परिषद पहुंचीं। राम प्रकाश गुप्ता ने भी एमएलसी बनकर सदन की सदस्यता ली।

वहीं, राजनाथ सिंह और मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा उपचुनाव लड़ा। अखिलेश यादव 2012 में लोकसभा सांसद रहते मुख्यमंत्री बने थे, जबकि योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सांसद रहते शपथ ली और बाद में एमएलसी बने। 2022 में योगी सीधे विधानसभा चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने।

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