सीएम विजय ने परिसीमन पर चर्चा के लिए बुलाई बैठक: 57 में से 37 सांसदों ने किया बहिष्कार, अनुपस्थित प्रतिनिधियों ने लगाए आरोप

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय ने राज्य के सभी सांसदों की अहम बैठक बुलाई थी। जिसमें केंद्र की प्रस्ताविक परिसीमन प्रक्रिया और प्रदेश में इसके संभावित असर को लेकर चर्चा होनी थी। इस मीटिंग में ज्यादातर सांसदों ने बहिष्कार कर दिया है। राज्य में कुल 57 सांसद है, इनमें 39 लोकसभा और 18 राज्यसभा के है। मुख्यमंत्री की बुलाई बैठक में सिर्फ 20 सांसद ही पहुंचे, जबकि 37 सांसद उपस्थित नहीं हुए। जिसे राजनीति हलकों में बड़ा झटका माना जा रहा है।
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इन पार्टियों के सांसदों ने बनाई दूरी
सीएम विजय की मीटिंग में मुख्य रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सांसद शामिल हुए थे। इनमें कांग्रेस के 12, वीसीके दो, सीपीआई दो, MDMK एक और IUML एक सासंद मौजूद रहे। इस मीटिंग को लेकर डीएमके ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनके सांसद इसका बहिष्कार करेंगे। समाचार एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राज्य के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने 6 और 7 अगस्त को अलग-अलग सांसदों को आमंत्रण भेजा था। इसके बाद भी डीएमके के 30, AIADMK चार, पीएमके एक, एमएनएम एक और डीएमडीके एक सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए थे।
अनुपस्थित सांसदों ने लगाए आरोप
इस मीटिंग में शामिल नहीं होने वाले सांसदों ने आरोप लगाया कि विजय सरकार कावेरी जल विवाद जैसे मुख्य मुद्दों पर ध्यान भटका रही है। इस वजह से यह बैठक बुलाई है। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच यह विवाद दशकों पुराना है। हालिया दिनों में यह विवाद फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि कर्नाटक सरकार इस नदी पर मेकेदाटू प्रोजेक्ट बनाना चाहती है, जिसका तमिलनाडु सरकार विरोध कर रही है। सीएम विजय ने इस मामले को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के बीच बातचीत का प्रस्ताव रखा था।
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इस बैठक पर कांग्रेस ने दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस बैठक को लेकर कहा, "तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों के तमिलनाडु के सभी सांसदों की एक बैठक बुलाई थी। हममें से करीब 21 लोग बैठक में शामिल हुए और इस बात पर पूरी सहमति थी कि तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कम नहीं किया जा सकता। जनसंख्या या किसी दूसरे आधार पर किसी भी तरह के बदलाव और परिसीमन का विरोध किया जाएगा।"
सीटों के बंटवारे पर क्या बोले?
कांग्रेस सांसद आगे कहते हैं, "हम चाहते हैं कि संसद की संख्या 543 पर ही बनी रहे और राज्यों के बीच सीटों का बंटवारा भी वैसा ही रहे, यानी 543 सदस्यों वाले सदन में तमिलनाडु के 39 सदस्य हों। हमारी सर्वसम्मत राय स्पष्ट है कि बड़ी संसद बेअसर होगी और इससे तमिलनाडु का भला नहीं होगा। इसलिए हम चाहते हैं कि संसद की सदस्य संख्या 543 ही रहे और तमिलनाडु के लिए 39 लोकसभा सांसदों का प्रतिनिधित्व भी वैसा ही बना रहे।"
Created On :   8 Aug 2026 7:13 PM IST












