Meenakshi Natarajan News: मीनाक्षी नटराजन के मामले के बीच आया योगेंद्र यादव का रिएक्शन, कहा - लोकतंत्र है, रहेगा, चुनाव जरूर...

मीनाक्षी नटराजन के मामले के बीच आया योगेंद्र यादव का रिएक्शन, कहा - लोकतंत्र है, रहेगा, चुनाव जरूर...
मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने पर सियासत गरम है। इसके बाद मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने पर सियासत गरम है। इसके बाद मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका को नामंजूर कर दिया है। हालांकि, जस्टिस प्रशांत किशोर मिश्रा औअर जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने यह साफ किया है कि कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दी प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, "लोकतंत्र है, रहेगा, चुनाव जरूर होंगे बस वोट कौन देगा यह बीजेपी चुनेगी और कैंडिडेट कौन हो सकते हैं यह भी बीजेपी चुनेगी।" उन्होंने आगे कहा, "चीन में भी ऐसा लोकतंत्र है।"

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यदि अदालत यह तय करने लगे कि किन मामलों में नामांकन रद्द किया जाना इतना गलत है कि वह सीधे अनुच्छेद 32 या 226 के तहत हस्तक्षेप कर सकती है, और किन मामलों में उम्मीदवार को चुनाव याचिका का रास्ता अपनाना चाहिए, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 329 में ऐसी व्यवस्था जोड़ रही होगी जो वहां लिखी ही नहीं गई है।"

उन्होंने कहा, "हमें डर है कि ऐसी किसी भी व्याख्या को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता, जिसके तहत कुछ मामलों में यह अदालत हस्तक्षेप करे और कुछ अन्य मामलों में पक्षकारों को चुनाव न्यायाधिकरण का सहारा लेने के लिए छोड़ दे।" भारतीय संवनिधान का अनुच्छेद 329 चुनाव संबंधी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक लगता है। जिससे न्यायिक देरी के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की रद्द की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता। वहीं, कोर्ट ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो।

कोर्ट ने कहा, "निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद सामान्यत: इसका उपाय कहीं और उपलब्ध होता है। क्या इस न्यायालय का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो?"

सुप्रीम कोर्ट में नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी प्रत्याशी को केवल वहीं आपराधिक मामला घोषित करना होता है। जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रवाधान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे।

Created On :   12 Jun 2026 7:27 PM IST

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