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जन्मदिन विशेष: कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 50 वां जन्मदिन आज, जानें उनकी ये खास बातें

June 19th, 2020 12:59 IST
जन्मदिन विशेष: कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 50 वां जन्मदिन आज, जानें उनकी ये खास बातें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी (Rahul gandhi) आज 50 वर्ष के हो चुके हैं। हालांकि कोविड-19 महामारी और चीन सीमा पर भारतीय जवानों की शहादत को लेकर राहुल गांधी ने अपना जन्मदिन न मानने का फैसला किया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। अमेरिका और इंग्लैड से पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2004 से भारतीय राजनीति में सक्रिय राहुल गांधी ने अपने जीवन अब तक किए उतार-चढ़ाव देखें है। पिछले साल लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन कांग्रेस की राजनीति अब भी उनके इर्द-गिर्द ही घूमती है। 

आइये जानते राहुल गांधी के जीवन से जुड़ी वो बातें जो आमतौर पर मीडिया में कम ही नजर आती हैं...

विदेश में शिक्षा
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसने ब्रिटिश कालीन भारत से लेकर आजाद भारत तक भारतीय राजनीति में अपनी सक्रियता दिखाई है। राहुल गांधी के परिवार में सबकी शिक्षा अच्छी हुई, हांलाकि राहुल गांधी अपने परिवार में अबतक के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे शख्स हैं। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट इकॉनॉमिक्स में एम.फिल किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ सालों तक एक प्रबंधन कंपनी में काम भी किया। फिर वो भारत लौट आए।

राजनीति में शुरूआती कदम
विदेश में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटे राहुल गांधी जनवरी 2004 से अबतक भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं। राहुल जनवरी 2004 में पहली बार उत्तर प्रदेश के अमेठी गए थे। यह उनके पिता राजीव गांधी का लोकसभा क्षेत्र था। पूर्व पीएम राजीव गांधी अमेठी से चुनाव लड़ते थे। तब उस सीट पर उनकी मां सोन‌िया गांधी सांसद थीं। जब उन्होंने अमेठी का दौरा किया तब साफ हो गया कि वो राजनीति में उतर रहे हैं। मार्च 2004 में राहुल ने लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। 

पहली चुनावी जीत
कांग्रेस पार्टी से भारत की राजनीति में कदम रखने वाले राहुल गांधी ने अपना पहला चुनाव साल 2004 में अमेठी जीत से जीता था। राहुल ने यहां करीब तीन लाख वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। उन्हें 3,90,179 वोट मिले थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीएसपी के चंद्र प्रकाश मिश्रा को 9,326 वोट और बीजेपी के राम विलास वेदांती को 55,438 वोट मिले थे। 

बड़ा पद लेने से कर दिया था मना
राहुल गांधी राजनीति में जन-जन से मिलकर आगे बढ़ाना चाहते थे। कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठकें करना। गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क करना राहुल की राजनीति में हमेशा शामिल रहा है। जब साल 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार बनी। तब राहुल गांधी युवा नेता बनकर उभरे। जनवरी 2006 हैदराबाद में कांग्रेस का एक सम्मेलन चल रहा था। इसमें हजारों युवा कांग्रेसी कार्यकर्ता व नेता चाहते थे कि वो पार्टी में बड़ी भूमिका लें। राहुल ने तब बड़ा पद लेने से मना कर दिया था।

बाबरी मस्जिद पर दिया था बयान 
राहुल गांधी ने साल 2007 में अयोध्या में बनी बाबरी मस्जिद को लेकर एक बयान दिया था। उनके इस बयान पर विपक्षी दल बीजेपी ने उन्हें कई बार निशाना बनाया। राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के वक्त अगर गांधी परिवार का कोई शख्स राजनीति में प्रमुख रूप से सक्रिय होता तो ऐसा नहीं होता। राहुल के इस बयान को तब विपक्षी पार्टी बीजेपी ने प्रमुख मुद्दा बनाया। एम वेंकयानायडू लगातार उनपर प्रहार करते रहे। 

जब चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति हटाए गए 
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने साल 2008 में राहुल गांधी को चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों के सामने संबोधन देने की अनुमति नहीं दी थी। मीडिया में इस बात को बड़े स्तर पर उठाया गया था। इस घटना के कुछ दिन बाद ही उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के कुलपति टीवी राजेश्वर को हटा दिया था। कुलपति को अचानक पद से हटाए जाने को तब राहुल गांधी की ताकत से जोड़कर देखा गया था।

2009 में फिर जीता चुनाव 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने साल 2009 के आम चुनावों में एक बार फिर जीत दर्ज की थी। राहुल ने उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीएसपी के आशीष शुक्ला को तीन लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। शुक्ला को 93,997 वोट मिले थे। जबकि 71.78 फीसदी वोटों के साथ राहुल गांधी को 4,64,195 वोट मिले। इस साल यूपीए 2 की सरकार बनी। राहुल गांधी प्रमुख चेहरे बनकर उभरे। हांलाकि राहुल के पीएम पद पर ताजपोशी पर पार्टी में ही सहमति नहीं बन पाई। 

कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उपाध्यक्ष के तौर पर साल 2013 में ताजपोशी की गई। इस दौरान राहुल गांधी ने एक बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि 'कल रात मां मेरे कमरे में आईं, वो मेरे पास बैठी और रोने लगी, वो इसलिए रोई क्योंकि जो ताकत बहुत लोग पाना चाहते हैं वो असल में जहर है' राहुल ने कहा कि सत्ता की ताकत का अच्छा और बुरा दोनों असर पड़ता है। हमें अच्छे को साथ रखना है। 

जब अमेठी का किला खिसकने लगा
साल 2014 के आम चुनाव में यूपीए सरकार की बहुत बुरी हार हुई। कांग्रेस पार्टी महज 44 सीटों पर सिमट गई। इस दौरान राहुल गांधी विरोधियों के निशाने पर आए। हालांकि राहुल मुश्किल से अमेठी की सीट बचाने में कामयाब रहे, लेकिन बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने काफी हद तक राहुल के किले का हिलाकर रख दिया था। राहुल के 4,01,651 वोटों की तुलना में स्मृति को 3,00,748 वोट मिले। यहीं से लगने लगा कि अमेठी का किला राहुल के लिए खिसकने लगा है साथ ही कांग्रेस पार्टी का भी पतन इसी चुनावों के साथ शुरू हो चुका था। 

राहुल को सौंपी की गई पार्टी की कमान
दिसंबर 2017 में कांग्रेस पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही थी। उन दिनों राहुल गांधी को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में चुनाव जीता। हांलाकि बाद में मध्य प्रदेश में फिर बीजेपी ने वापसी की। लोकसभा चुनाव 2019 में राहुल कांग्रेस को उबार नहीं पाए। कांग्रेस को फिर बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। खुद राहुल अमेठी से अपनी सीट नहीं बचा पाए। हालांकि वायनाड से सात लाख वोटों से कहीं ज्यादा अंतर से जीत के साथ वो लोकसभा में जरूर पहुंचने में कामयाब रहे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।