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आज की राजनीति अंग्रेजों से उधार ली हुई है : प्रो़ रामजी सिंह (गांधी जयंती पर विशेष साक्षात्कार)

September 28th, 2019 10:30 IST
 आज की राजनीति अंग्रेजों से उधार ली हुई है : प्रो़ रामजी सिंह (गांधी जयंती पर विशेष साक्षात्कार)

पटना, 28 सितंबर (आईएएनएस)। लंबे, दुबले-पतले, खद्दरधारी, कंधे में झोला लटकाए, चाल में किसी युवा से भी अधिक फुर्ती, देश के करीब हर कोने में गांधी समागम में दिख जानेवाले, युवकों के साथ घुलने-मिलने वाले प्रोफेसर रामजी सिंह की पहचान आज भी यही है, जो वर्षो पहले थी।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गांधीवादी चिंतक के रूप में प्रसिद्ध रामजी सिंह ने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के साथ-साथ सन् 1974-75 के छात्र आंदोलन में भी शिरकत की। लगभग बीस माह तक मीसा एक्ट के अंतर्गत बंदी रहे। वर्ष 1977 में भागलपुर से सांसद निर्वाचित हुए, लेकिन इन्होंने चुनाव लड़ने के लिए एक पैसा खर्च नहीं किया था।

सिंह ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में कहा, मैं जब चुनाव लड़ा तो अपराधियों के गढ़ तक में गया, लेकिन कभी किसी ने चोट नहीं पहुंचाई, बल्कि वो हमसे डरते थे। अब तो ये सब कुछ सपने जैसा लगता है। आज मैं चुनाव लड़ना चाहूं, तो लोग मेरी जात पूछेंगे।

उन्होंने दावे के साथ कहा, मैं सांसद रहते हुए भी साइकिल से गांव-गांव जाता था और लोग साइकिल रोककर मुझसे बात कर लेते थे, अपनी समस्या बता देते थे। आज भी आप उस क्षेत्र में जाकर पूछ सकते हैं।

प्रो. सिंह ने आज की राजनीति में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि आज जनता के हित की राजनीति नहीं हो रही है, केवल राजनीतिक दलों के प्रमुखों के दिशा-निर्देशों पर ही राजनीति हो रही है।

उन्होंने कहा, यदि जनता की आवाज सुनी जाती तो निर्णय जनमत से लिए जाते। आज राजनीति में नीति नहीं है, सिद्धांतविहीन इस राजनीति का कोई आधार नहीं है। आज की राजनीति को बदलना होगा, यह अंग्रेजों से उधार ली गई राजनीति है।

बिहार के मुंगेर में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सिंह पटना विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर, जैन धर्म पर पीएचडी, राजनीति विज्ञान के अंतर्गत विचार में डी़ लिट् कर प्रो़ सिंह हिंद स्वराज पर यूजीसी के ऐमेरिटस फेलो रह चुके हैं।

पचास से अधिक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन कर चुके सिंह के हजारों लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में देश-विदेश में प्रकाशित हुए हैं। गांधी विचार और सामाजिक साधना सवरेदय से जुड़े रहने के कारण उनकी ख्याति पूरी दुनिया में गांधी-विचारकों के गूढ़ अध्येता के रूप में है।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 113 जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित सिंह कहते हैं कि गांधी विचारधारा भारतीय संस्कृति और वांग्मय का नवनीत है। गांधीजी ने अहिंसा के रास्ते छोटे-छोटे आंदोलन से पहले देश की जनता का मानस तैयार किया और फिर 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। देश आजाद जरूर हो गया, लेकिन गांधीजी जिन-जिन मुद्दों पर जोर देते थे, वे आज भी बरकरार हैं।

बकौल सिंह, गरीबी और बेकारी के साथ गैर बराबरी की समस्या दूर होने पर ही भारत सच्चे अर्थो में स्वाधीन होगा।

वे कहते हैं कि गांधी को समझना है तो उनका साहित्य पढ़ना होगा, ना कि सुनी-सुनाई बातों पर अपना मत बनाया जाए। गांधी जी के पूरे दर्शन को समझने के लिए एक ही किताब पढ़ी जानी चाहिए और वो है हिंद स्वराज। जीवन के उलझे सवालों का जवाब देना ही दर्शनशास्त्र का बुनियादी उद्देश्य है। भौतिकता की आंधी में हमने अपने पर्यावरण का भी नाश कर दिया है, जिसका समाधान अपरिग्रह सिद्धांत के द्वारा ही संभव है।

गांधीजी को विज्ञान का विरोधी बताए जाने को नकारते हुए सिंह बेबाक कहते हैं, यह वास्तविकता से अलग है। गांधीजी आत्मज्ञान एवं विज्ञान के समन्वय पर बल देते थे। उनका कहना था कि आत्मज्ञान के बिना विज्ञान अंधा है और विज्ञान के बिना आत्मज्ञान पंगु है।

अपने जीवन को गांधी के विचारों के प्रति समर्पित करने वाले सिंह कहते हैं कि देश के सामने सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी एवं विषमता है। उन्होंने कहा कि आज देश में आर्थिक विषमता की दर 27 प्रतिशत पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति के पास इतनी दौलत है जो 27 व्यक्तियों के पास नहीं है।

भागलपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक रहने के दौरान विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के लिए कार्य करने वाले सिंह ने शैक्षिक प्रयोजन से दुनिया के बीस से अधिक देशों की यात्रा की है।

गांधी, विनोबा और जयप्रकाश के विचारों के प्रखर प्रवक्ता के रूप में पहचान बनाने वाले सिंह बिहार सवरेदय मंडल के अध्यक्ष के रूप में बिहार के विभिन्न जिलों में भूदान किसानों की बेदखली को लेकर लगातार सत्याग्रह आंदोलन चलाया।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के कुलपतित्व काल में जब भागलपुर विश्वविद्यालय में गांधी विचार के अध्ययन अध्यापन का प्रस्ताव रखा गया था, तब प्रो़ सिंह ने उन्हें कार्यरूप दिया। परिणामस्वरूप 1980 में भागलपुर विश्वविद्यालय में गांधी विचार की पढ़ाई आरंभ हुई और वे इस विभाग के संस्थापक विभागाध्यक्ष बने। गांधी विचार विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहते सिंह ने अपनी पांच हजार पुस्तकें और हस्तलिखित नोट्स विभाग को दे दी थी, इसमें अधिकांश गांधी के विचारों से ही जुड़े थे।

आज देश-दुनिया में हो रही हिंसा के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने आईएएनएस से कहा, हम विश्व को केंद्र में रखें और आणविक युद्ध के कगार पर खड़ी दुनिया को बचाने का सामूहिक प्रयास करें। आत्मज्ञान के बिना अहिंसा की शक्ति प्राप्त नहीं होती।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।