comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

पश्चिम बंगाल: मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद दीदी, राजनीति से दूर सौरभ गांगुली दूसरी पसंद, आईएएनएस सी-वोटर के सर्वे में खुलासा


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में दो बार शासन करने वाली तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी अभी भी राज्य का नेतृत्व करने के लिए लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं। एक सर्वेक्षण में सोमवार को यह बात सामने आई। वहीं बीसीसीआई प्रमुख और पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरव गांगुली, जिन्होंने अभी तक अपने राजनीतिक करियर की घोषणा भी नहीं की है, उन्हें भी राज्य के काफी लोग मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाह रहे हैं।

राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के सभी क्षेत्रों में 18,000 से अधिक लोगों पर किए गए आईएएनएस सी-वोटर सर्वेक्षण के नतीजों में यह आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे में शामिल 48.8 प्रतिशत लोग ममता बनर्जी (दीदी) को फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाह रहे हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री के तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख दिलीप घोष को 18.7 प्रतिशत लोगों ने अपना समर्थन दिया है।

इस बीच सौरव गागुली, जिन्होंने अभी तक अपने राजनीतिक करियर की घोषणा भी नहीं की है, उन्हें तीसरे नंबर पर राज्य में शीर्ष पद के लिए पंसद किया गया है। सर्वेक्षण में शामिल 13.4 प्रतिशत लोग गांगुली को सबसे उपयुक्त मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने वाले हैं, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिखाई दे रही है।

सर्वे में कहा गया कि मुकुल रॉय, जो टीएमसी से भाजपा में आए थे, मुख्यमंत्री की दौड़ में बनर्जी से काफी पीछे हैं, क्योंकि केवल 6.9 प्रतिशत लोग ही उन्हें शीर्ष पद के सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में देखते हैं।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 4.1 प्रतिशत लोग मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सुजन चक्रवर्ती को मुख्यमंत्री के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी का नंबर आता हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, महज 2.5 प्रतिशत लोग चौधरी को सबसे उपयुक्त मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में देखते हैं।

सर्वेक्षण में सामने आया कि राज्य के 2.1 प्रतिशत लोग सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं, जो पिछले महीने टीएमसी से भाजपा में आए हैं। वहीं केवल 1.3 प्रतिशत आसनसोल से भाजपा सांसद बाबुल सुप्रीयो को शीर्ष पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में देखते हैं।

कमेंट करें
vbKo1
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।