comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

नहीं हुआ करते थे बॉक्सिंग ग्लव्स खरीदने के पैसे, जीता भारत के लिए गोल्ड

September 02nd, 2018 17:06 IST
नहीं हुआ करते थे बॉक्सिंग ग्लव्स खरीदने के पैसे, जीता भारत के लिए गोल्ड

हाईलाइट

  • बिना ग्लव्स के ही प्रेक्टिस कर लिया करते थे।
  • आर्थिक स्थिती के चलते अमित के बड़े भाई अजय पंघल ने बॉक्सिंग छोड़ दी थी।
  • बड़े भाई के कोच ने मुझे पंच लगाते देखा तो बॉक्सिंग में आगे बढ़ने को कहा।

डिजिटल डेस्क, जकार्ता। 22 साल के भारतीय बॉक्सर अमित पंघाल ने एशियन गेम्स के 14वें दिन शनिवार को भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया। यह गोल्ड उन्होंने बॉक्सिंग की लाइट फ्लाईवेट (49 किग्रा) कैटेगरी में उज्बेकिस्तान के रियो ओलिंपिक चैम्पियन हसनबॉय दुस्मतोव को हराकर जीता। अमित ने हसनबॉय दुस्मतोव को गोल्डन मुकाबले में 3-2 से हराया था। मुकाबले पर जीत हासिल करने के बाद अमित ने बताया कि, अखिरी दिन केवल मेरा ही मुकाबला बचा हुआ था। भारत को बॉक्सिंग में एक भी गोल्ड मेडल नहीं मिला था। सब की उम्मीदें मुझसे थी, इसलिए यह मेरी अब तक की सबसे बड़ी जीत है। इस जीत के साथ अमित लाइट फ्लाईवेट कैटेगरी में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बॉक्सर बन गए हैं। 

कहा जाता है कि एक समय जब अमित के परिवार की आर्थिक स्थिती अच्छी नहीं थी। तब उनके पास बॉक्सिंग ग्लव्स खरीदने के पैसे भी नहीं होते थे। वे एक ही ग्लव्स से कई महीनों तक प्रेक्टिस करते थे। अगर ग्लव्स खराब हो जाता था। तो वे बिना ग्लव्स के ही प्रेक्टिस कर लिया करते थे। एक बॉक्सर के लिए सही डाइट बहुत जरूरी होती है। पर अजय को यह भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो पाती थी। 

दूसरे देशों में भी ट्रेनिंग करने का मौका मिलना चाहिए

लाइटवेट में पहला गोल्ड लाने पर अमित ने कहा, "लाइटवेट में हमेशा से ही मेडल कम ही आए हैं। इसके लिए हमारे पास खिलाड़ी भी कम हैं। हमारे खिलाड़ियों को दूसरे देशों में भी ट्रेनिंग करने का मौका मिलना चाहिए। मुझे एशियन चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल और वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में हार मिली थी। वहां मेरे पर्फोरमेंस में कोई कमी नहीं थी बल्कि दोनों मुकाबलों में मैं बड़े खिलाड़ीयों से हारा था। हालांकि उस हार के बाद भी मुझे सीखने को ही मिला था।

हरियाणा के रोहतक जिले के मैना गांव में रहने वाले अमित के पिता, विजेंदर सिंह एक साधारण किसान हैं। जो अपनी एक एकड़ की जमीन पर ही गेहूं और बाजरे की खेती किया करते हैं। अमित के परिवार की आर्थिक स्थिती कभी बहुत अच्छी नहीं रही। इसके चलते अमित के बड़े भाई अजय पंघल ने बॉक्सिंग छोड़ दी थी। अब अमित के बड़े भाई अजय आज भारतीय सेना में हैं। 

परिवार की माली हालत खराब 

2011 तक हमारे परिवार की आर्थिक स्थिती अच्छी नहीं थी। हमें खेती में भी काफी नुकसान हुआ था जिसकी वजह से आमदनी ज्यादा नहीं हुआ करती थी। उस समय मैं  बॉक्सिंग किया करता था और मेरे कोच अनिल धांकर हुआ करते थे। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर बनने का था लेकिन पारिवारिक हालातों के चलते मुझे बॉक्सिंग छोड़नी पड़ी। मैं 2011 में आर्मी में नायब के पद पर भर्ती हो गया ताकी मेरा घर चल सके। आर्मी में रहते हुए मैंने यह सुनिश्चित किया कि अमित की बॉक्सिंग नहीं छूटनी चाहिए। क्योंकि मुझे भरोसा था कि जो काम मैं नहीं कर पाया वो मेरा छोटा भाई जरूर करेगा।  इन सभी चुनौतियों के बावजूद भी अमित ने अपनी जी-तोड़ मेहनत और बुलंद हौंसले के दम पर बड़े-बड़े बॉक्सर को मात देकर गोल्ड मेडल हासिल किए। कई बार तो अमित ने खाली पेट रहकर भी ट्रेनिंग की है और जीत हासिल की है। 

अमित भारतीय सेना में जेसीओ हैं और नायब सूबेदार के पद पर हैं। उन्होंने 2006 में बॉक्सिंग करना शुरू किया था। अमित के पिता विजेन्दर सिंह ने कहा, 'हमारे परिवार ने ओलिंपिक मेडल के लिए काफी त्याग किया है। आज जो मेडल उसने पाया है उससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा लेकिन हम सभी का सपना है कि वह ओलिंपिक में गोल्ड हासिल कर देश का नाम ऊंचा करे। 

ओलिंपिक की तैयारी पर अमित ने कहा

मुझ पर उसका दबाव तो नहीं है लेकिन गोल्ड जीतने के बाद अब मुझसे देश की उम्मीदें बढ़ गई हैं। मेरा अगला लक्ष्य टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल लाना है। इसके लिए मेरी तैयारी एशियाड के साथ ही चल रही है। बॉक्सिंग को चुनने पर अमित ने कहा,  मैं अपने बड़े भाई के साथ खेलने जाता था। वहां कोच ने मुझे पंच लगाते देखा तो बॉक्सिंग में आगे बढ़ने को कहा। मैं रोजाना 10 घंटे तक अभ्यास करता हूं। डाइट, एक्सरसाइज और नींद सभी का टाइम फिक्स है। 

कमेंट करें
McNeu
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।