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मार्शल आर्ट्स में विश्व चैम्पियन बनना लक्ष्य : रितु फोगाट

November 07th, 2019 12:24 IST
मार्शल आर्ट्स में विश्व चैम्पियन बनना लक्ष्य : रितु फोगाट

हाईलाइट

  • मार्शल आर्टस में विश्व चैम्पियन बनना लक्ष्य : रितु फोगाट

नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता भारत की महिला पहलवान रितु फोगाट कुश्ती के अखाड़े में ताल ठोकने के बाद अब मिक्स मार्शल आर्ट्स (एमएमए) में उतरने जा रही हैं और इस खेल में भी उनका लक्ष्य विश्व चैम्पियन बन कर भारत को मजबूत पहचान दिलाना है।

लोकप्रिय फोगाट बहनों में से एक रितु अब मेक वन चैंपियनशिप से एमएमए की शुरुआत करेंगी। पेशेवर एमएमए में उनका पहला मुकाबला बीजिंग में 16 नवंबर को होगा। वह वन चैंपियनशिप की ऐज ऑफ ड्रैगन प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगी। 24 वर्षीय रितु ने मार्शल आर्ट्स संगठन वन चैंपियनशिप से करार किया है।

मैच से पहले रितु ने आईएएनएस से कहा कि वह एमएमए में विश्व चैम्पियन का तमगा हासिल करने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बनना चाहती हैं।

रितु ने कहा, मैं शुरू से ही कुछ अलग करना चाहती थी और शुरू से ही मिक्स मार्शल आर्ट्स देख रही थी। मैं हमेशा सोचती थी कि एमएमए में भारत से कोई विश्व चैंपियन क्यों नहीं है? और यही वजह थी जो मुझे एमएमए में लेकर आई।

रितु ने नवंबर 2017 में सिंगापुर में हुई अंडर-23 कुश्ती चैम्पियनशिप के 48 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीता था और उन्होंने सिंगापुर में ही एमएमए की ट्रेनिंग हासिल की है।

उन्होंने कहा, एमएमए की ट्रेनिंग के लिए सिंगापुर स्थित इवोल्व एमएम सबसे अच्छी ट्रेनिंग जिम है और मैंने भी वहीं से अपनी ट्रेनिंग की है। इवोल्व एमएम ने दुनिया को कई सारे विश्व चैम्पियन दिए हैं और इसलिए मैंने इसे चुना।

रितु एमएमए में भाग लेने वाली भारत की दूसरी एथलीट होंगी। उनसे पहले भरत खंडारे एमएमए की यूएफसी जैसी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उतर चुके हैं। भारतीय महिला पहलवान के लिए कुश्ती के मुकाबले एमएमए काफी मुश्किल होने वाला है और इसमें उन्हें कुश्ती के मुकाबले ज्यादा चुनौतियां मिलने वाली हैं।

नए खेल में आने वाली चुनौतियों पर रितु ने कहा, मुझे चुनौतियां पसंद हैं और मैं हर चुनौती को स्वीकार करती हूं। मिक्स मार्शल आर्ट्स में आकर अब मुझे प्रतिदिन कुछ न कुछ नया सीखने को मिल रहा है। इसके अलावा मुझे नई-नई तकनीकों के बारे में भी पता चल रहा है और मुझे लगता है कि मैंने इसमें अब काफी सुधार किया है।

रितु को अपने इस नए खेल में काफी सफल होने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अपनी ट्रेनिंग और खुद पर विश्वास है। रितु एमएमए के अपने पदार्पण मुकाबले में कोरिया की नेम ही किम से भिड़ेंगी।

रितु ने कहा, जहां तक इसमें सफल होने की बात है तो मुझे खुद पर और अपनी ट्रेनिंग पर पूरा विश्वास है। मैंने अब तक जितनी भी ट्रेनिंग हासिल की है उसे मैं वहां पर आजमाना चाहती हूं। इसमें मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं और खुद को साबित भी करना चाहती हूं।

रितु की एक बहन और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली बबीता ने हाल ही में हरियाणा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गई थीं। रितु से जब बबीता की तरह राजनीति में आने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह भविष्य के बारे में ज्यादा सोच नहीं रही हैं।

रितु ने कहा, भविष्य के बारे में अभी कुछ कह नहीं सकती हूं। अभी मेरा पूरा ध्यान एमएमए पर है, इसलिए फिल्हाल अभी मैं किसी और चीज के बारे में नहीं सोच रही हूं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।