Man-to-Hanuman Program: चिन्मय मिशन के 75वें अमृत महोत्सव में दक्षिण अफ्रीका में गूंजा हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, 17,000 श्रद्धालु हुए शामिल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के डरबन स्थित चैट्सवर्थ स्टेडियम में हाल ही में चिन्मय मिशन के 75वें अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित "मैन टू हनुमान" कार्यक्रम में 17,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर नया इतिहास रचा। स्वामी अभेदानंद सरस्वती के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में हनुमान चालीसा का 27 बार सामूहिक पाठ किया गया, जिससे कुल चार लाख से अधिक पाठ पूरे हुए। इसे भारत के बाहर सनातन परंपरा के सबसे बड़े सार्वजनिक आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान पूरा स्टेडियम केसरिया ध्वजों, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर दिखाई दिया। विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ कर एकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के लिए भेजे अपने विशेष संदेश में चिन्मय मिशन के 75 वर्षों की आध्यात्मिक सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासियों ने दक्षिण अफ्रीका के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक जीवंत सेतु का कार्य किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सामूहिक प्रार्थना और भक्ति समाज में शांति, सद्भाव और करुणा को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है।
अनूप जलोटा और अनुजा सहाय ने बांधा समां
पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा और गायिका-अभिनेत्री अनुजा सहाय के भजन एवं सामूहिक मंत्रोच्चार ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अनूप जलोटा ने अपने संबोधन में चिन्मय मिशन की वैश्विक आध्यात्मिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि 2026 में स्वामी अभेदानंद दक्षिण अफ्रीका में अपनी आध्यात्मिक सेवा के 20 वर्ष पूरे करेंगे।
स्वामी अभेदानंद का संदेश
स्वामी अभेदानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं से अपनी आध्यात्मिक पहचान पर गर्व करने और समाज में सेवा, सद्भाव तथा एकता के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उनके आह्वान पर पूरा स्टेडियम तीन बार "मैं एक गर्वित हिंदू हूँ" के उद्घोष से गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान की तस्वीर और केसरिया ध्वज लहराकर अपनी आस्था व्यक्त की।
हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
कार्यक्रम में क्वाज़ुलु-नताल और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को लाने के लिए 80 से अधिक बसों की व्यवस्था की गई। लगभग 200 स्वयंसेवकों ने आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं, जबकि 20,000 से अधिक महाप्रसाद के पैकेट तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किए गए। सभी आगंतुकों को धार्मिक साहित्य, प्रसाद और स्मृति सामग्री से युक्त विशेष स्वागत किट भी प्रदान की गई।
स्थानीय नेतृत्व की भी रही मौजूदगी
कार्यक्रम में क्वाज़ुलु-नताल के प्रीमियर थामी न्तुली भी शामिल हुए। उन्होंने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की सेवा की सराहना करते हुए दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
चिन्मय मिशन के अनुसार, यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, सेवा और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ।
Created On :   16 July 2026 10:01 PM IST









