MP News: ग्वालियर में IAS के नाम से फर्जी फेसबुक प्रोफाइल, रिटायर्ड इंजीनियर से 1.60 लाख की ठगी

ग्वालियर में IAS के नाम से फर्जी फेसबुक प्रोफाइल, रिटायर्ड इंजीनियर से 1.60 लाख की ठगी
फर्नीचर बेचने का दिया सस्ता ऑफर, रकम लेने के बाद सामान नहीं भेजा; तीसरी बार 88 हजार मांगने पर हुआ शक

डिजिटल डेस्क, भोपाल। ग्वालियर में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने एक आईएएस अधिकारी के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर रिटायर्ड इंजीनियर को अपना शिकार बना लिया। आरोपियों ने पहले फेसबुक पर आईएएस अधिकारी पी. नरहरि के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। इसके बाद उनके कथित परिचित को सीआरपीएफ कमांडेंट बताते हुए सस्ते दाम में फर्नीचर बेचने का ऑफर दिया। झांसे में आए रिटायर्ड इंजीनियर से करीब 1.60 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। मामले में मुरार पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फेसबुक पर भेजी IAS के नाम से रिक्वेस्ट

मुरार क्षेत्र में रहने वाले सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर मैथिली शरण गुप्ता को फेसबुक पर पी. नरहरि के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। प्रोफाइल आईएएस अधिकारी की होने के कारण गुप्ता ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली।

इसके बाद आरोपी ने उनसे मोबाइल नंबर मांगा। कुछ समय बाद उसने सुमित कुमार नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भेजते हुए उसे अपना परिचित और सीआरपीएफ कमांडेंट बताया। आरोपी ने कहा कि सुमित का तबादला हो गया है और वह ग्वालियर में अपना फर्नीचर व अन्य घरेलू सामान बेचना चाहता है।

पांच लाख का सामान 95 हजार में देने का झांसा

सुमित कुमार के नाम से बात करने वाले व्यक्ति ने गुप्ता को वॉट्सऐप पर फर्नीचर की तस्वीरें भेजीं। आरोपियों ने बताया कि करीब पांच लाख रुपए का फर्नीचर केवल 95 हजार रुपए में दिया जाएगा। सस्ता सौदा देखकर गुप्ता तैयार हो गए। आरोपियों ने उनके बताए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। लेकिन भुगतान के बाद भी फर्नीचर नहीं पहुंचा।

सामान भेजने के नाम पर फिर लिए 61,500 रुपए

जब गुप्ता ने सामान के बारे में पूछा तो आरोपियों ने फर्नीचर को पैक कर भेजने और निकालने के नाम पर उनसे 61,500 रुपए और जमा करा लिए। इसके बाद भी सामान नहीं आया। कुछ समय बाद आरोपी ने फिर 88 हजार रुपए की मांग कर दी। लगातार पैसे मांगने पर गुप्ता को संदेह हुआ। उन्होंने आईएएस अधिकारी पी. नरहरि से सीधे संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।

असली अधिकारी से बात हुई तो खुला फर्जीवाड़ा

पी. नरहरि ने बातचीत से संबंधित फोटो और वीडियो मांगे। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी। मामला सामने आने की भनक लगते ही आरोपियों ने वॉट्सऐप से कई फोटो और मैसेज डिलीट कर दिए और गुप्ता से बातचीत बंद कर दी।

पीड़ित की शिकायत पर मुरार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर रही है। साथ ही आरोपियों की पहचान और लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिकारी के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर करते हैं ठगी

पुलिस के अनुसार, साइबर ठग कई बार लोगों का भरोसा जीतने के लिए अधिकारियों, सैन्यकर्मियों या अन्य प्रतिष्ठित लोगों के नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया या वॉट्सऐप के जरिए सस्ते सामान, नौकरी, निवेश या अन्य ऑफर का लालच दिया जाता है।

सावधानी: सोशल मीडिया पर किसी अधिकारी या परिचित के नाम से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट को तुरंत स्वीकार करने के बजाय पहले पहचान की पुष्टि करें। ऑनलाइन खरीदारी या किसी सामान के लिए पैसे भेजने से पहले विक्रेता की पूरी जानकारी जांचना भी जरूरी है।

Created On :   25 Sept 2026 1:05 AM IST

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