MP News: पटवारी ने राष्ट्रपति से जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की कीमतों को लेकर की हस्तक्षेप की मांग

पटवारी ने राष्ट्रपति से जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की कीमतों को लेकर की हस्तक्षेप की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की मनमानी कीमतों को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की मनमानी कीमतों को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। पटवारी ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है। पटवारी ने पत्र में कहा कि जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की कीमतों में असामान्य अंतर है। आज देश का आम नागरिक बीमारी से लड़ने के साथ-साथ इलाज की कीमत से भी लड़ रहा है। आवश्यक कैंसर दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता व्यक्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के सामने यह तथ्य रखा गया कि एक कैंसर दवा का मूल्य रिटेल में 2700 था, जबकि उसका अधिकतम रिटेल प्राइस 27000 अंकित था। मरीज से वसूली जाने वाली अधिकतम कीमत उस कीमत की लगभग दस गुनी थी। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर माना है।

मरीजों के साथ हो रही वसूली पर कड़ी टिप्पणी की है। पटवारी ने कहा संबंधित प्राधिकरण ऐसी स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं करता। यह व्यवस्था की समीक्षा का विषय है। पटवारी ने कहा कि देश में ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 पहले से अस्तित्व में है। सरकार के पास प्राइस कंट्रोल करने का रास्ता है। सरकार सार्वजनिक हित में उपलब्ध शक्तियों का उपयोग क्यों नहीं कर रही। कैंसर का उपचार सामान्य उपभोक्ता बाजार की वस्तु नहीं है। कैंसर से पीड़ित व्यक्ति के सामने दवा खरीदना किसी विकल्प का प्रश्न नहीं, बल्कि जीवन बचाने की मजबूरी होती है। ऐसी परिस्थिति में एमआरपी और वास्तविक आपूर्ति मूल्य के बीच असामान्य अंतर का बोझ सीधे मरीज और उसके परिवार पर पड़ता है।

8 बिंदुओं पर हस्तक्षेप की मांग

-सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठे इस गंभीर मुद्दे के संबंध में केंद्र सरकार से तत्काल विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाई जाए।

-केंद्र सरकार बताए जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की कीमतों में असाधारण अंतर को रोकने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

-कैंसर सहित गंभीर और जीवन रक्षक रोगों में प्रयुक्त सभी आवश्यक दवाओं की मौजूदा मूल्य-नियंत्रण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कराई जाए।

-सीलिंग प्राइस और रिटेल प्राइस निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

- प्राइज टू रिटेल, प्राइज टू स्टॉकिस्ट और मैक्सिमम रिटेल प्राइस के बीच दवाओं की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और जांच हो।

-कैंसर सहित गंभीर रोगों की दवाओं के लिए ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें मरीज और उसके परिवार को दवा की वास्तविक नियंत्रित कीमत, व्यापारिक मार्जिन और अधिकतम खुदरा कीमत की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

-सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में ऐसी दवाओं की खरीद और री-इंबर्समेंट का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए, ताकि सार्वजनिक धन से अनावश्यक रूप से अत्यधिक कीमत का भुगतान न हो।

-आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं को व्यापक मूल्य-नियंत्रण के दायरे में लाने के लिए केंद्र सरकार को समयबद्ध नीति तैयार करने के लिए निर्देशित किया जाए।

Created On :   25 Sept 2026 12:52 AM IST

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