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कोरोना फिर बरपा सकता है कहर, गलतियां न करें, सावधान रहें, बच कर रहें

कोरोना फिर बरपा सकता है कहर, गलतियां न करें, सावधान रहें, बच कर रहें

डिजिटल डेस्क,  नागपुर।  ठंड का मौसम शुरू होने के साथ ही कोरोना ने एक बार फिर पैर फैलाना शुरू कर दिया है। अन्य शहरों की तुलना में फिलहाल नागपुर में राहत है, लेकिन इससे यह नहीं समझें कि खतरा टल गया है। जब तक वैक्सीन नहीं है, तब सावधानी ही वैक्सीन है, यह मानकर जीवन को जीना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनलॉक के बाद कुछ लोग लापरवाही बरतने लगे हैं। लॉकडाउन हटने के बाद लोग विभिन्न कार्यों के लिए घर से बाहर निकल रहे हैं। अधिकांश लोग आवश्यक सावधानियां बरत रहे हैं, फिर भी कई गलतियां कर रहे हैं। यही गलतियां कोरोना से संक्रमित करने के लिए काफी हंै। तो आइए जानते हैं वह कौन सी गलतियां हैं।

संपर्क में आते ही क्वारेंटाइन हो जाएं
कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में यदि आप आए हैं, तो 14 दिनों के लिए खुद को बिना हिचक क्वारंटाइन कर लें। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप में कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई देते हों। यह आप और आपके संबंधियों के लिए बेहतर होगा। कभी-कभी लोगों में लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, और यही खतरे की घंटी है। इसलिए सावधानियां बरतें।

मास्क का वॉल्व न खोलें
अगर आप वॉल्व वाला मास्क पहनते हैं, तो मास्क का वॉल्व न खोलें। खोलने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मास्क पहनकर सांस लेने में तकलीफ नहीं होती है। ऐसे में आप कभी भी वॉल्व न खोलें।

दूरी बनाए रखें
कोरोनाकाल में शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। इसके बावजूद लोग 6 फीट की दूरी का पालन नहीं करते हैं। अगर आप अपने दोस्तों अथवा रिश्तेदारों के साथ लंच अथवा डिनर के लिए जाते हैं, तो खाने के इस दूरी को जरूर बनाए रखें।

डॉक्टर को न भूलें
चक्कर आना, सूंघने की क्षमता खो जाना, कमजोरी, सर्दी और खांसी होने पर डॉक्टर से जरूर सलाह लें। बुखार आने पर थर्मामीटर से जरूर जांच करें। कुछ लोगों को संक्रमण के बावजूद बुखार नहीं आता है।

छींकते समय मास्क न उतारें
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क को कभी न भूलें। यही इस समय की कारगर वैक्सीन है। जब कभी आप अनचाही वस्तुओं को छूएं, तो अपने हाथों को जरूर साबुन से धोएं, या सैनिटाइजर से सैनिटाइज करें।  खांसने और छींकने के समय अपने मुंह को रुमाल से ढंक लें। यदि मास्क पहने हैं, तो छींकते और खांसते समय मास्क बिल्कुल ही न उतारें। देखने में आया है कि जब छींक आती है, तो कुछ लोग मास्क उतार कर छींकते हैं। यह सबसे बड़ी गलती है। ऐसा कर एक तरह से अपराध कर रहे हैं।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।