कटनी: मौसम का सितम जारी, एक सप्ताह से दिन का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस

January 15th, 2022

  डिजिटल डेस्क कटनी सर्द हवाओं का सितम मकर संक्रांति के अवसर पर दिन में बरकरार रहा। जिसके चलते सूर्य उत्तरायण पर सर्दी ने नया रिकार्ड बनाया। 30 वर्ष के अधिकतम औसत तापमान 24.3 का आंकड़ा भी इस दौरान ठंडे के पारे के आगे जमा रहा। 22.3 डिग्री सेल्सियस में दिन की सर्दी ने सुबह से लेकर शाम तक सितम ढाया। घने कोहरे के साथ सुबह का आगाज हुआ। आठ बजे के बाद कुछ समय के लिए जरुर लोगों को सूर्य भगवान के दर्शन हुए। इसके बाद बादलों का जमावड़ा हो गया। सूर्य भगवान फिर से बादलों की ओट में छिप गया। लुकाछिपी का यह खेल पूरे दिन तक बना रहा। इस दौरान शीत लहर के जोर के आगे सूर्य की किरणें भी बेवस दिखाई दी। मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि आगामी समय में दिन का पारा तो ऊपर की ओर खिसकेगा, लेकिन  रात का पारा गोता लगाएगा।
पांच दिनों का तापमान
दिनांक       अधिकतम    न्यूनतम
10 जनवरी       23         11
11 जनवरी            24  12.9
12 जनवरी           23.2          ९.५
13 जनवरी           22.1          ८.८
14 जनवरी           22.३          10
1963 में सबसे अधिक सितम
जनवरी में रात का औसत तापमान 7 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द ही मंडराता रहता है। सौ वर्ष में 1963 में जनवरी की सभी रातों ने ठंड के मामलों में सबसे अधिक कहर बरपाया था। इस माह रात का औसत तापमान 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसी कोई रात नहीं रही, जब इसके ऊपर ठंड का पारा पहुंचा हुआ हो। सौ वर्ष के आंकड़े में रात का औसत तापमान इससे ऊपर ही रहा।
पिछले वर्ष में मिली थी राहत
वर्ष 2021 में मकर संक्रांति का अहसास लोगों को सूर्य की तीखी किरणों से हो गया था। दिन का पारा 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। रात का भी पारा 11.५ डिसे पर बना रहा। इस बार सर्द रातों के साथ दिन भी लोग ठंड से कंपकंपाते हुए नजर आए।
उत्तर-पूर्वी हवा का रहेगा जोर
ठंड से अभी लोगों को राहत नहीं मिलने वाली है। उत्तर-पूर्वी हवा का असर आगामी दिनों में बना रहेगा। जिससे दिन में तो राहत मिलेगी, लेकिन रात में पहले की अपेक्षा और अधिक ठंडक का एहसास लोगों को होगा। इस ठंड का असर अलग-अलग फसलों में अलग-अलग होगा। कृषि विज्ञान केन्द्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ.संदीप कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि गेहूं के लिए तो सामान्य मौसम है। बादलों के छाए रहने से चने और अरहर की फसलों में इल्लियां लगने की संभावना है। इसलिए किसान लगातार फसलों का निगरानी करते रहे। एक से अधिक इल्लियां पाए जाने पर फौरन ही कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क करते हुए
निदान का उपाए पा सकते हैं।