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दिल्‍ली के चिड़‍ियाघर में फिर शेर के पिंजरे में गिरा युवक, उसके बाद क्या हुआ तमाशा?

दिल्‍ली के चिड़‍ियाघर में फिर शेर के पिंजरे में गिरा युवक, उसके बाद क्या हुआ तमाशा?

हाईलाइट

  • दिल्ली स्थित चिड़िया घर में एक युवक गुरुवार को शेर के पिंजरे में जा गिरा

डिजिटल डेस्क। दिल्ली स्थित चिड़िया घर में एक युवक गुरुवार को शेर के पिंजरे में जा गिरा। शेर के सामने युवक को देखकर आस-पास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे चिड़िया घर के कर्मचारियों ने युवक को शेर के पंजों में जाने से बचाया। हादसा कैसे हुआ इसकी जांच की जा रही है। इसी तरह का एक वाकया दिल्ली के चिड़िया घर में सन 2014 में भी हुआ था। उस घटना में शेर ने युवक को मार डाला था।

दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने घटना की पुष्टि की है। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने आगे कहा, घटना दोपहर करीब 12 बजे घटी। युवक का नाम रेहान (21) है। रेहान बिहार का मूल निवासी है।

देवेश श्रीवास्तव के मुताबिक, रेहान क्या करता है इसका पता नहीं चला है। यह भी जांच की जा रही है कि, रेहान एक हादसे के चलते गिरा या फिर यह घटना किसी शरारत का परिणाम है।

घटना के वक्त मौके पर काफी लोग थे। उसी वक्त अचानक रेहान के शेर के पिंजरे में गिर जाने से भगदड़ मच गई। शेर के पिंजड़े (बाड़े) में युवक के गिरने की खबर फैलते ही मौके पर पुलिस और चिड़िया घर के कर्मचारी भी पहुंच गए।

देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने आगे कहा, अब तक हुई छानबीन में यही पता चला है कि मौत के मुंह में जाते-जाते बचा युवक रेहान दिल्ली घूमने आया था।

संयुक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, मौके पर लकड़ी की एक बल्ली टूटी पाई गयी है। जांच इस बात की भी की जा रही है कि आखिर बल्ली कैसे टूटी?

उन्होंने युवक रेहान के कुशल होने की पुष्टि करते हुए कहा, लकड़ी की बल्ली कैसे टूटी? क्या लकड़ी की बल्ली को जबरदस्ती दबाब देकर तोड़ा गया या फिर वह कमजोर होने के चलते टूट गई जिससे युवक रेहान शेर के करीब जा पहुंचा। इन तमाम सवालों की पड़ताल चिड़िया घर प्रशासन भी कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि इसी तरह की एक लापरवाही पूर्ण घटना में सितंबर 2014 में दिल्ली के 27 साल के एक युवक को जान से हाथ धोना पड़ गया था। इसी चिड़िया घर में घूमने पहुंचा एक युवक सफेद शेर के सामने जा गिरा। 10 मिनट तक शेर और युवक आमने-सामने डटे रहे, अंतत: शेर ने युवक को मार डाला था। हादसे में जान गंवाने वाले युवक का नाम मकसूद था।

मकसूद दिल्ली के ही आनंद पर्वत इलाके में स्थित एक गत्ता फैक्टरी में नौकरी करता था। वो मूलत: जयपुर (राजस्थान) रहने वाला था। जिन दिनों मकसूद ने शेर के हाथों अपनी जान गंवाई, तब वो दिल्ली के जखीरा इलाके में माता-पिता के साथ रह रहा था।

घटना वाले दिन मकसूद सफेद शेर के पिंजरे में जा गिरा था। उसका पैर फिसल गया था। जब तक सुरक्षाकर्मियों ने मकसूद को शेर के सामने से बचाने के उपाय किए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।