अजब- गजब: हजारों सालों से रखा है परशुराम का फरसा, अब भी नहीं लगी जंग

September 14th, 2021

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सहित दुनियाभर में कई सारी अद्भुत और अनोखी जगह हैं। अब तक आपने कई सारी अजब गजब चीजों के बारे में सुना भी होगा। ऐसी ही एक रोचक जगह है झारखंड की राजधानी रांची। इस जगह भगवान परशुराम का फरसा जमीन में गड़ा हुआ है। यहां परशुराम के चरण चिह्न भी बताए जाते हैं। सबसे सोचनीय बात यह कि यहां रखे हुए फरसे में हजारों साल के बाद भी जंग नहीं लगी है। 

जबकि सभी जानते हैं कि, लोहे में ​पानी लगने पर जंग लग जाती है और वह कुछ समय बाद खाख हो जाता है। लेकिन भगवान परशुराम का वह फरसा आज भी वैसा ही रखा हुआ है। इस स्थान से एक अद्भुत कथा भी जुड़ी है। आइए जानते हैं इस अजब गजब जगह के बारे में...

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नहीं लगता फरसे पर जंग
कहा जाता है कि झारखंड बांग्ला से 150 किमी दूर घने जंगल में तांगीनाथ धाम इलाका नक्सल प्रभावित है। स्थानीय भाषा में फरसा को तांगी कहते हैं, इसलिए इस स्थान का नाम तांगीनाथ धाम पड़ा। यह फरसा यहां हजारों सालों से बिना किसी देखभाल के गड़ा हुआ है लेकिन आज तक इस पर जंग नहीं लगी है। लोगों का कहना है कि फरसा भूमि में कितना गड़ा हुआ है, यह कोई नहीं जानता। 

कहानी है प्रचलित
इसके बारे में एक कहानी भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार इस इलाके में लोहार आकर रहने लगे थे। काम के दौरान उन्हें लोहे की जरूरत हुई तो उन्होंने परशुराम का यह फरसा काटने की कोशिश की। काफी कोशिश के बाद भी वे फरसा नहीं काट पाए, लेकिन इसका नतीजा बहुत बुरा हुआ। उस परिवार के सदस्यों की मौत होने लगी। इसके बाद उन्होंने वह इलाका छोड़ दिया। आज भी टांगीनाथ धाम के आसपास लोहार नहीं रहते। 

घटना का खौफ आज भी
उस घटना का खौफ उनके मन में आज भी ताजा है। टांगीनाथ धाम में प्राचीन मंदिर व शिवलिंग के अवशेष हैं। यहां की स्थापत्य कला केदारनाथ धाम जैसे बहुत पुराने मंदिरों से मेल खाती है। बताया जाता है कि एक बार यहां खुदाई भी की गई और उसमें कई कीमती चीजें पाई गई थीं। नक्सल प्रभावित इलाके में स्थित होने के बावजूद टांगीनाथ धाम में श्रद्धालु आते हैं। परशुराम द्वारा भगवान शिव की तपस्या से पवित्र यह स्थल विशाल फरसे के कारण किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

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परशुराम जी से जुड़ी घटना
परशुराम जी की बात करें तो लगभग सभी जानते हैं, वे महान तपस्वी हैं उन्होंने तप से अद्भुत सिद्धि और शक्तियां प्राप्त की हैं। रामायण काल के दौरान हुई एक घटना में भी उनका वर्णन है। जब भगवान श्री राम ने सीता जी के स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ा तो परशुराम बहुत क्रोधित हो गए और स्वयंवर स्थान पर आ गए। लेकिन जब परशुराम को पता चलता है कि श्री राम स्वयं विष्णु के अवतार हैं, तो उन्हें पछतावा होता है कि उन्होंने श्री राम को अपमानित किया और परशुराम स्वयंवर से जगंल की ओर चले जाते हैं। जगंल में वे अपना फरसा भूमि में गाड़ देते हैं और भगवान शिव की तपस्या करते हैं। उसी जगह पर आज टांगीनाथ धाम स्थित है। लोगों का विश्वास है कि परशुराम जी का फरसा आज भी यहां गड़ा हुआ है।