अजब गजब: युवक ने बनवाया ऐसी छत वाला घर, 60% तक घटा बिजली बिल; गर्मी में 5-10 डिग्री ठंडा रहता है मकान

युवक ने बनवाया ऐसी छत वाला घर, 60% तक घटा बिजली बिल; गर्मी में 5-10 डिग्री ठंडा रहता है मकान
गर्मियों में पक्के मकानों की छतें दिनभर धूप में तपती हैं। इसका सीधा असर घर के अंदर के तापमान पर पड़ता है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों में पक्के मकानों की छतें दिनभर धूप में तपती हैं। इसका सीधा असर घर के अंदर के तापमान पर पड़ता है। यही वजह है कि भीषण गर्मी में बिना एसी या कूलर के रहना मुश्किल हो जाता है। लेकिन हरियाणा के एक आर्किटेक्ट ने इसका देसी और वैज्ञानिक तरीका खोज निकाला है। उन्होंने अपने घर की छत को इस तरह डिजाइन किया कि गर्मी का असर काफी कम हो गया।

आर्किटेक्ट गोकुल गोयल ने छत के निर्माण में मिट्टी के कुल्हड़ और वेस्ट टाइल्स का इस्तेमाल किया। उनका दावा है कि इस तकनीक से घर का तापमान बाहर की तुलना में करीब 5 से 10 डिग्री तक कम रहता है। इतना ही नहीं, एसी का इस्तेमाल कम होने से उनके बिजली बिल में करीब 60% तक की कमी आई है।

मिट्टी के कुल्हड़ से तैयार की छत

गोकुल ने अपने पुराने घर के रिनोवेशन के दौरान छत पर यह प्रयोग किया। उन्होंने पारंपरिक कंक्रीट की जगह करीब 7 हजार मिट्टी के कुल्हड़ों और वेस्ट टाइल्स से विशेष लेयर तैयार की।

सबसे पहले पुरानी छत की ऊपरी परत हटाई गई। इसके बाद सतह की सफाई कर वॉटरप्रूफिंग की गई। वॉटरप्रूफिंग के ऊपर सीमेंट का प्लास्टर किया गया। इसके बाद पूरी छत पर मिट्टी के कुल्हड़ लगाए गए।

गोकुल के मुताबिक, करीब एक वर्ग फीट जगह में 10 कुल्हड़ लगाए गए। कुल्हड़ों के बीच खाली जगह को सीमेंट-कंक्रीट से भरा गया। इसके बाद वेस्ट टाइल्स को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर छत पर बिछाया गया।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

गोकुल बताते हैं कि इस पूरी तकनीक का मकसद छत से घर के अंदर पहुंचने वाली गर्मी को रोकना है। मिट्टी के कुल्हड़ों के बीच बनी एयर गैप एक तरह से इंसुलेशन का काम करती है। वहीं टाइल्स की परत धूप की गर्मी को काफी हद तक वापस रिफ्लेक्ट करने में मदद करती है।

उनके अनुसार, चाइनीज मोजेक टाइल्स करीब 70% तक गर्मी रिफ्लेक्ट कर सकती हैं, जबकि मिट्टी के कुल्हड़ भी गर्मी को नीचे जाने से रोकने में मदद करते हैं। दिनभर धूप पड़ने के बावजूद छत पर जमा होने वाली गर्मी सीधे नीचे के कमरे तक नहीं पहुंचती।

गोकुल का कहना है कि उत्तर भारत में घरों में आने वाली गर्मी का बड़ा हिस्सा छत के जरिए अंदर पहुंचता है। ऐसे में छत का सही तरीके से ट्रीटमेंट करने पर घर के अंदर का तापमान काफी कम रखा जा सकता है।

राजस्थान-गुजरात में भी इस्तेमाल होती है तकनीक

गोकुल के मुताबिक, चाइनीज मोजेक तकनीक का इस्तेमाल राजस्थान, गुजरात और मुंबई जैसे इलाकों में भी किया जाता है। हालांकि उन्होंने अपनी छत में इसके साथ मिट्टी के कुल्हड़ों का इस्तेमाल कर एक अलग तरह की लेयर तैयार की।

उन्होंने यह भी बताया कि इस काम के लिए सामान्य आकार के कुल्हड़ नहीं, बल्कि खास आकार के मिट्टी के कुल्हड़ इस्तेमाल किए गए हैं।

700 वर्ग फीट की छत पर करीब डेढ़ लाख खर्च

गोकुल के अनुसार, इस तरह की छत तैयार करने में करीब 200 रुपए प्रति वर्ग फीट का खर्च आता है। यानी अगर छत का क्षेत्रफल 700 वर्ग फीट है तो कुल लागत लगभग 1.5 लाख रुपए तक हो सकती है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा उन्हें गर्मियों में मिला। गोकुल के मुताबिक, करीब 5 महीने तक एसी का इस्तेमाल कम करना पड़ा, जिससे बिजली के बिल में लगभग 60% तक की बचत हुई।

इसे कहते हैं पैसिव कूलिंग

गोकुल की छत में इस्तेमाल की गई तकनीक को पैसिव कूलिंग कहा जाता है। इसमें बिजली से चलने वाले उपकरणों के बजाय भवन की डिजाइन और निर्माण सामग्री के जरिए अंदर का तापमान नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।

मिट्टी के कुल्हड़, एयर गैप और रिफ्लेक्टिव टाइल्स की परत मिलकर छत से घर के अंदर पहुंचने वाली गर्मी को कम करने में मदद करती हैं। यही वजह है कि भीषण गर्मी में भी घर के ऊपरी हिस्से का तापमान अपेक्षाकृत कम बना रहता है।

Created On :   6 Oct 2026 1:20 AM IST

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