दैनिक भास्कर हिंदी: आर्टिकल 15: धमकियों से परेशान डायरेक्टर ने लिखा लेटर, कहा मेरी पत्नी भी ब्राह्मण

June 27th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना की नई फिल्म 'आर्टिकल-15' जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। रिलीज से पहले ही फिल्म को विवादों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, फिल्म का ट्र्रेलर रिलीज होने के बाद, ब्राह्मण समुदाय ने फिल्म की टीम पर आरोप लगाया कि उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई है। साथ ही ​डायरेक्टर अनुभव सिन्हा को भी धमकी भरे फोन और खत भेजे गए। इन सब चीजों से परेशान होकर फिल्म के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने सोशल मीडिया पर एक ओपन ​लेटर लिखा। उन्होंने लेटर में लिखा कि यह फिल्म किसी भी तरह से किसी समुदाय का अनादर नहीं करती। 

अनुभव सिन्हा ने अपने लेटर में लिखा कि 'देश के सभी ब्राह्मण संगठनों को मेरा नमस्कार। साथ ही करणी सेना को भी। साथ ही मैं इस पत्र के माध्यम से आप के उन सभी सदस्यों को क्षमा भी करता हूं, जिन्होंने असहमति और विरोध की मर्यादाओं का उल्लंघन किया। मेरी हत्या या मेरी बहनों और मेरी दिवंगत मां के बलात्कार की धमकियों से संवाद नहीं हो सकता। मेरा विश्वास है कि आप में से अधिकतर लोग इस प्रकार के विरोध का सामना नहीं करेंगे। सबसे पहले मैं आपको ये समझा दूं कि किसी भी फिल्म का ट्रेलर उसकी पूरी कहानी नहीं कह पाता। सम्भव नहीं है। फिल्म के बहुत से टुकड़ों को जोड़कर एक आकर्षक कहानी बताने का प्रयास होता है। कोई भी फिल्म किसी भी समाज का निरादर करने का प्रयास करेगी ऐसी सम्भावना कम है।

डॉयरेक्टर ने आ्गे लिखा कि 'अब फिल्म आर्टिकल 15 की बात करते हैं। मेरा विश्वास करें फिल्म में ब्राह्मण समाज का कोई निरादर नहीं किया गया है। आप को जानकर हर्ष होगा कि फिल्म के बनाए जाने में मेरे कई ब्राह्मण साथी भी हैं, कई कलाकार भी। कोई कारण नहीं है कि ब्राह्मणों का निरादर किया जाए। वैसे मेरी पत्नी भी ब्राह्मण हैं। सो मेरे पुत्र के अस्तित्व में भी ब्राह्मण समाते हैं और चलिए शायद मेरी बात का विश्वास न भी हो रहा हो तो कुछ यूं करते हैं। सोमवार से फिल्म हमारे पत्रकार साथियों को मुंबई और दिल्ली में दिखाई गई है। कई विवेचनाएं भी इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। मैं अपने उन सभी पत्रकार मित्रों को आमंत्रित करता हूं कि इस पत्र के उत्तर में वो आप सभी को आश्वस्त करें कि फिल्म में ब्राह्मण समाज का निरादर नहीं किया गया है। न ही राजपूत समाज का।'