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31 साल की उम्र में ही इस एक्ट्रेस की हो गई थी मौत, एक्टर बेटे ने लिखा इमोशनल पोस्ट, पति है राजनेता 

31 साल की उम्र में ही इस एक्ट्रेस की हो गई थी मौत, एक्टर बेटे ने लिखा इमोशनल पोस्ट, पति है राजनेता 

डिजिटल डेस्क (भोपाल)   बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकारा स्मिता पाटिल को गुजरे हुए तीन दशक से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन वे आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। उनकी फिल्म 'बाजार' के एक गीत के शब्द,  'करोगे याद तो, हर बात याद आएगी, गुज़रते वक़्त की, हर मौज ठहर जाएगी'। उनके चाहने वालों के दर्द को समझने के लिए काफी हैं।  दिवंगत स्मिता पाटिल के एक्टर बेटे प्रतीक बब्बर ने अपनी मां को पुण्यतिथि पर याद करते हुए एक भावुक नोट लिखा है। प्रतीक ने अभिनेत्री की एक मोनोक्रोम तस्वीर साझा करते हुए, लिखा, "34 साल पहले आज मेरी मां ने हमें छोड़ दिया .. वर्षों से मैं मेरे दिमाग और दिल में .. उनकी सही छवि की कल्पना करने और बनाने की कोशिश की है। वह एकदम परफेक्ट मां है, एकदम परफेक्ट महिला और आदर्श रोल मॉडल हैं। वह एक छोटे से बच्चे की आंख का तारा हैं। मैं हमेशा आपके जैसा बनना चाहता हूं और मेरे जीवन के अंतिम छड़ों तक आप मेरे साथ रहोगी"। 


 17 अक्टूबर 1955 को महाराष्ट्र के पुणे शहर में जन्मीं स्मिता के पिता शिवाजी राय पाटिल राज्य सरकार में मंत्री थे, जबकि उनकी मां एक समाज सेविका थी। उन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत मुम्बई टीवी में एक एंकर के तौर पर की थी। 


मशहूर निर्माता-निर्देशक श्याम बेनेगल ने स्मिता की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें अपनी फिल्म 'चरणदास चोर' में एक छोटी सी भूमिका निभाने को कहा। यहीं से उनकी फिल्मों का दौर शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड की कई बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। इनमें बाजार, नमक हलाल, शक्ति , घुंघरू जैसी कई फिल्में शामिल हैं। उन्होंने दो बार नेशनल अवार्ड्स जीता और साथ ही उन्हें चार फिल्मफेयर अवार्ड भी मिले। साल 1985 में भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुये उन्हें पदमश्री से सम्मानित किया गया। कुछ फिल्में एक्टर राज बब्बर के साथ करने के बाद उन्होंने उनसे विवाह कर लिया। जिससे एक बेटा भी हुआ, लेकिन बेटे प्रतीक के जन्म के बाद ही स्मिता पाटिल का निधन हो गया। राज बब्बर अब एक बड़े कांग्रेस नेता हैं। 

स्मिता पाटिल एक आकर्षक व्यक्तित्व की महिला थी। मैथिली राव द्वारा उनकी जीवनी भी लिखी गई थी। मैथिली ने लिखा था कि 'स्मिता को वायरल इन्फेक्शन की वजह से ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था। प्रतीक के पैदा होने के बाद वो घर आ गई थीं। वो बहुत जल्द हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार नहीं होती थीं, कहती थीं कि मैं अपने बेटे को छोड़कर हॉस्पिटल नहीं जाउंगी।  

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।