Exclusive Interview: मां की साड़ी पहनकर बने थे सीता, अब पहली बार राम बनेंगे रवि किशन

मां की साड़ी पहनकर बने थे सीता, अब पहली बार राम बनेंगे रवि किशन
कभी मां की साड़ी पहनकर माता सीता बनने वाले रवि किशन अब पहली बार भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने जा रहे हैं। भोजपुरी सिनेमा से लेकर हिंदी फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले रवि किशन का रामलीला से रिश्ता करीब 40 साल से भी पुराना है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कभी मां की साड़ी पहनकर माता सीता बनने वाले रवि किशन अब पहली बार भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने जा रहे हैं। भोजपुरी सिनेमा से लेकर हिंदी फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले रवि किशन का रामलीला से रिश्ता करीब 40 साल से भी पुराना है। उम्र के तकरीबन नौ-दसवें साल में जौनपुर से शुरू हुआ यह सफर अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच रहा है, जहां वे रामायण के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक भगवान राम का किरदार निभाते नजर आएंगे। अपनी इस नयी भूमिका पर रविकिशन ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की और बताया कि प्रभु श्री राम बनने से पहले कैसी है उनकी तैयारी....

मां की साड़ी पहनकर बना था सीता

रवि किशन ने बचपन में ही रामलीला के मंच पर कदम रख दिया था। उन्होंने कहा, उस समय मेरी उम्र करीब नौ-दस साल थी। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में रामलीला के दौरान मैंने माता सीता का किरदार निभाया था । इस भूमिका के लिए मैंने अपनी मां की साड़ी पहनी थी। अभिनय के प्रति मेरा लगाव इतना गहरा था कि मैं रामलीला में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित रहता था। लेकिन, मेरे पिताजी को मेरा अभिनय करना पसंद नहीं था और इस वजह से मुझे उन्होंने काफी मारा भी है। वह कहते थे कि मेरा दिमाग ख़राब हो गया है कि मैं नचनिया बनना चाहता हूं ? इसके बावजूद अभिनय के प्रति मेरा आकर्षण कम नहीं हुआ।

सीता से सुग्रीव, अंगद , भगवान परशुराम और केवट तक का सफर

समय के साथ मेरा रामलीला से जुड़ाव बना रहा और मैंने मंच पर किरदार भी निभाए गए। बचपन में माता सीता की भूमिका से लेकर रामायण के दूसरे महत्वपूर्ण पात्रों को भी मंच पर जीवंत किया। सुग्रीव और केवट जैसे किरदार निभा चुके हैं। केवट का चरित्र मेरे लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यह भगवान राम के प्रति निष्काम सेवा, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। मैंने रामलीला के मंच पर अंगद, भरत और भगवान परशुराम जैसे पात्रों की भूमिकाएं भी निभाई हैं।

अब पहली बार भगवान श्रीराम

रामलीला में कई महत्वपूर्ण किरदार निभाने के बाद साल 2026 में मेरा बचपन का सपना पूरा होने जा रहा है। रामलीला में मैं पहली बार भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने जा रहा हूं । 19 -20 अक्टूबर को मैं मंच पर उनके गेटअप में रहूंगा। इस भूमिका को लेकर मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं, कि मैं बस उनको मंच पर ठीक से प्रस्तुत कर सकूं। यहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है। रामलीला में प्रभु श्री राम को देखने के लिए भारी संख्या में लोग आएंगे। भगवान राम का चरित्र मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस भूमिका को निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी है। यही प्रार्थना कर रहा हूं कि मंचन के समय भगवान मेरे शरीर में थोड़ी देर के लिए प्रवेश कर जाएं और मैं उन्हें संपूर्णता के साथ निभा सकूं। मुझसे कोई गलती ना हो। बचपन में माता सीता के किरदार के जरिए रामलीला से जुड़ाव हुआ था, उसी कथा के केंद्रीय पात्र प्रभु राम को अब मैं मंच पर साकार करने जा रहा हूं।

मूंछे मुंडवा रहा हूं, नवरात्री का व्रत भी है

प्रभु श्री राम की छवि हमेशा क्लीन चेहरे की रही है और मेरी फिलहाल मूंछे हैं जिसे इस किरदार के लिए मैं मुंडवा रहा हूं। मैं वेश भूषा से लेकर शब्दों के उच्चारण पर भी काफी ध्यान दे रहा रहा हूं जिससे कोई त्रुटि ना हो। प्रभु को निभाने के लिए आपको वेशभूषा के साथ अपने आचरण पर भी काम करना चाहिए इसलिए भी यह सबसे बढ़िया संयोग है मेरे लिए। मैं वैसे भी शुद्ध शाकाहारी हूं लेकिन फिलहाल नवरात्र के कारण मैं फलाहार (व्रत) पर हूं।

Created On :   14 Oct 2026 7:02 PM IST

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