विकास कार्य शुरू: फडणवीस ने कहा - सरला बेट बनेगा महाराष्ट्र का प्रमुख तीर्थस्थल, विकास पूरा होने पर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

फडणवीस ने कहा - सरला बेट बनेगा महाराष्ट्र का प्रमुख तीर्थस्थल, विकास पूरा होने पर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
  • उपमुख्यमंत्री शिंदे बोले- 179 साल पुरानी हरिनाम सप्ताह की परंपरा समाज को जोड़ने वाली शक्ति
  • पालकमंत्री विखे पाटील ने कहा- आध्यात्मिक आयोजन से मिल रहा नशामुक्त और सशक्त समाज का संदेश
  • मुख्यमंत्री ने कहा- सभागृह, सड़क, बाढ़ सुरक्षा और सौर ऊर्जा समेत कई विकास कार्य शुरू

Ahilyanagar News. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरला बेट का सर्वांगीण विकास कर इसे महाराष्ट्र के प्रमुख तीर्थस्थलों में विकसित किया जाएगा। विकास कार्य पूरे होने के बाद सरला बेट प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनेगा। इसके लिए विकास योजना के तहत सभागृह, सड़क, बाढ़ सुरक्षा और सौर ऊर्जा सहित विभिन्न कार्य शुरू किए गए हैं। अखंड हरिनाम सप्ताह के कालाकीर्तन के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह बात कही। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, जलसंसाधन एवं पालकमंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील, पूर्व मंत्री बालासाहब थोरात, सांसद भाऊसाहब वाकचौरे, विधायक विट्ठलराव लंघे, अमोल खताल, आशुतोष काले, विवेक कोल्हे, वैजापुर विधायक रमेश बोरनारे तथा महंत रामगिरी महाराज सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

हरिनाम संकीर्तन समाज को जोड़ने की शक्ति

सद्गुरु योगीराज गंगागिरी महाराज द्वारा शुरू की गई अखंड हरिनाम सप्ताह की 179 वर्ष पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि सरला बेट से समाज को विचार, संस्कार और प्रेरणा मिलती है। हरिनाम संकीर्तन दुखों का हरण करता है, मन का अहंकार दूर करता है और जाति-भेद भुलाकर लोगों को एकजुट करता है। प्रत्येक व्यक्ति में भगवान विठ्ठल के दर्शन की भावना पैदा करने वाली यह परंपरा आज के समय में समाज को जोड़ने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता हजारों वर्षों से सनातन विचार, संस्कार और आध्यात्मिक परंपराओं को संजोए हुए है। अनेक आक्रमणों के बावजूद देश की श्रद्धा, संस्कार और विचारधारा को कोई बदल नहीं सका। वारकरी परंपरा, गुरु परंपरा और हरिनाम की शक्ति ने इस सांस्कृतिक विरासत को निरंतर जीवित रखा है।

‘हरिनाम सप्ताह केवल धार्मिक आयोजन नहीं’

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि अखंड हरिनाम सप्ताह एक अलौकिक आध्यात्मिक आयोजन है। इस भूमि को योगीराज गंगागिरी महाराज की तपस्या और आशीर्वाद प्राप्त है। महंत रामगिरी महाराज की अमृतवाणी से यहां भक्ति की अविरल धारा बह रही है। उन्होंने कहा कि यह सप्ताह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने तथा भक्ति और संस्कारों की ऊर्जा देने वाला उत्सव है। गंगागिरी महाराज द्वारा शुरू की गई 179 वर्ष पुरानी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही है। सप्ताह के कारण पूरे क्षेत्र में भक्ति, प्रसन्नता और मंगलमय वातावरण बना हुआ है।

‘समाज को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक आयोजन’

पालकमंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि अखंड हरिनाम सप्ताह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने, शांति प्रदान करने और जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक आयोजन है। सात दिनों के नामस्मरण और महंत रामगिरी महाराज की वाणी से समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बढ़ाने के साथ ही नशामुक्त एवं सशक्त समाज निर्माण का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि महंत रामगिरी महाराज आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

Created On :   25 Aug 2026 8:58 PM IST

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