Amravati News: अमरावती मनपा घोटाल: रिपोर्ट बनी, कार्रवाई गायब, मुंबई में अटकी जांच

अमरावती मनपा घोटाल: रिपोर्ट बनी, कार्रवाई गायब, मुंबई में अटकी जांच
प्रशासक राज के कारनामों पर डाला जा रहा पर्दा

Amravati News अमरावती मनपा के प्रशासक राज में हुए कई गंभीर मामलों की जांच पूरी होने के बावजूद कार्रवाई न होना अब बड़े सवाल खड़ा कर रहा है। राजेंद्र लॉज हादसा, ग्रीन जोन आरक्षण परिवर्तन और 14 बिंदुओं की अनियमितताओं जैसी अहम जांच रिपोर्टें मुंबई में लंबित पड़ी हैं। तीन साल बीत जाने के बाद भी जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पूरे मामले में शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

अक्टूबर 2022 को प्रभात टॉकीज के पास स्थित राजेंद्र लॉज की जर्जर इमारत का स्लैब अचानक ढह गया था। इस दर्दनाक हादसे में मजदूरों सहित पांच लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद शहर में आक्रोश फैल गया था और सरकार ने तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए थे। तत्कालीन संभागीय आयुक्त ने लगभग 300 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी, जिसमें मनपा के तत्कालीन अभियंता सुहास चव्हाण, उपअभियंता अजय विंचुरकर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया। बावजूद इसके, इतने गंभीर मामले में आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

ग्रीन जोन आरक्षण, पर्यावरण के साथ समझौता? : प्रशासक राज में शहर के 30 से अधिक ग्रीन जोन क्षेत्रों का आरक्षण बदलने का मामला भी विवादों में है। आरोप है कि इन भूखंडों को बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए उपयोग में लाया गया। इस मुद्दे को विधायक धीरज लिंगाडे ने विधानपरिषद में उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पर्यावरण से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर भी अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले भी दर्ज हुए मामले, परिणाम शून्य : मनपा में इससे पहले शौचालय घोटाला और मल्टीयूटिलिटी वैन खरीद प्रकरण जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, इन मामलों में भी आगे कोई ठोस कार्रवाई या निष्कर्ष सामने नहीं आया। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि जांच और एफआईआर के बाद भी परिणाम तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

नई जांच समिति: पुराने सवालों का क्या होगा जवाब? : 20 अप्रैल को हुई मनपा की आमसभा में तत्कालीन आयुक्त डॉ. आष्टीकर के कार्यकाल की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में नई समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब पहले से तैयार जांच रिपोर्टों पर ही कार्रवाई नहीं हुई, तो नई जांच का क्या परिणाम निकलेगा? क्या यह रिपोर्ट भी पूर्व की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी?

Created On :   25 April 2026 4:43 PM IST

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