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Amravati News: फोन पर मिलता है संदेश, जेल में कब फेंका जाएगा गांजा , माल-मसाला, सूखा मेवा जैसे कोडवर्ड

Amravati News कारागार में कैदियों को रिश्तेदारों से संपर्क के लिए दी गई फोन और वीडियो कॉलिंग सुविधा का दुरुपयोग सामने आ रहा है। सुत्रों से पता चला है कि कुछ कैदी बातचीत के दौरान कोडवर्ड का इस्तेमाल कर बाहरी लोगों को संदेश दे रहे हैं कि कब और कैसे जेल परिसर में गांजा या अन्य प्रतिबंधित सामग्री फेंकी जाए। बातचीत में माल-मसाला, सूखा मेवा कहां मिलता है जैसे शब्दों का उपयोग कर असल इशारा नशे की सामग्री की ओर किया जाता है।
जानकारी के अनुसार कॉल के दौरान सीधे तौर पर कुछ भी संदिग्ध न बोलते हुए, संकेतों में पूरी योजना बनाई जाती है। तय टाइमिंग पर बाहर से जेल परिसर में पैकेट फेंके जाने की कोशिश की जाती है। हालांकि कई मामलों में टाइमिंग चूकने या गतिविधियों पर नजर रखने के कारण ऐसे प्रयास पकड़े गए हैं। जेल प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि कॉल के दौरान सामने वास्तव में कौन व्यक्ति बात कर रहा है, इसकी सटीक पहचान करना कठिन होता है। कई बार दर्ज नंबर पर कॉल होने के बावजूद फोन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उठाया जाता है, जिससे निगरानी और नियंत्रण में परेशानी आती है। प्रशासन ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए निगरानी और सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए हैं। संदिग्ध कॉल्स की विशेष जांच, कॉल अवधि में नियंत्रण और बाहरी संपर्कों की जांच को और कड़ा किया जा रहा है, ताकि कारागार की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई असर न पड़े।
सुरक्षा दीवार के लिए 10 लाख की निधि मंजूर : अमरावती कारागार के पीछे हाईवे का पुल स्थित है। पुल की ऊंचाई इतनी है कि ऊपर से जेल परिसर का अंदरूनी हिस्सा साफ दिखाई देता है। इसी स्थान से पहले भी जेल के अंदर जलते पटाखे, गांजा के पैकेट और पुड़ियां फेंके जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यहां पुल से ऊंची सुरक्षा दीवार बनाने का प्रस्ताव कई साल पहले भेजा गया था, जो लंबे समय से गृहमंत्रालय में लंबित था। वर्तमान जेल अधीक्षक कीर्ति चिंतामणी ने पिछले दो वर्षों में लगातार स्मरण पत्र भेजकर आखिरकार 10 लाख रुपए की निधि मंजूर करवायी। लोक निर्माण विभाग को निधि मिलते ही जल्द ही सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
इतने सारे कैदियों को संभालना मुश्किल : बाहर पुलिस के पास किसी भी स्थिति से निपटने के लिए बड़ा बल मौजूद होता है, लेकिन कारागार में अमरावती संभाग सहित राज्य के कई जिलों के खूंखार कैदी बंद हैं। ऐसे में सीमित अधिकारी और कर्मचारियों के साथ उन्हें संभालना बेहद मुश्किल होता है। कैदियों की बैरकों की नियमित और सख्त तलाशी ली जाती है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि मिलने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज की जाती है। - कीर्ति चिंतामणी, जेल अधीक्षक, अमरावती कारागार
Created On :   23 April 2026 4:06 PM IST















