Bhopal News: डीजल की तुलना में एक तिहाई से भी कम ईंधन लागत पर चल रहे ई-वाहन : ICCT-MANIT रिपोर्ट

डीजल की तुलना में एक तिहाई से भी कम ईंधन लागत पर चल रहे ई-वाहन : ICCT-MANIT रिपोर्ट
आईसीसीटी-एमएएनआईटी ने इंदौर में इलेक्ट्रिक वाहनों पर किया अध्ययन , ई-बस में 54 प्रतिशत और ई-कचरा वाहन में 91 प्रतिशत कम उपयोग होती है ऊर्जा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। इलेक्ट्रिक बसों में डीजल और सीएनजी वाहनों से कम ऊर्जा का उपयोग होता है। सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में संचालित ई कचरा गाड़ियां डीजल की तुलना में एक तिहाई से भी कम ईंधन लागत पर चल रही हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) और मैनिट ने इंदौर में ई-वाहनों के उपयोग और उससे होने वाले लाभ का तुलनात्मक अध्ययन किया है। रिपोर्ट के अनुसार ई-बस 54 प्रतिशत और ई-कचरा संग्रह ट्रक 91 प्रतिशत डीजल की तुलना में कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं। लंबे समय की अवधि के बाद ई-वाहन की कॉस्ट डीजल या सीएनजी से काफी कम होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-बस और घर-घर कचरा संग्रह में ई-वाहन बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इंदौर में 49 ई-बस और 92 कचरा संग्रह के लिए ई-ट्रक शामिल हैं। इंदौर में ई बसें प्रतिदिन औसतन 148 किमी चलती है। जिसकी वास्तविक ऊर्जा उपभोग डीजल की तुलना में 54 प्रतिशत कम है। वहीं ई कचरा ट्रक हर दिन 16 किमी चलते हैं। जो डीजल की तुलना में 91 प्रतिशत और सीएनजी की तुलना में 89 प्रतिशत कम है। वाहनों के बार-बार रुकने और चलने से प्रदर्शन अधिक खराब होता है। रिपोर्ट में सामने आया है कि इलेक्ट्रिक कचरा गाड़ियां डीजल और सीएनजी की तुलना में सस्ती हैं। पूरे जीवनकाल में ई वाहन अन्य की तुलना में 75 प्रतिशत कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करती हैं। आईसीसीटी के एमडी अमित भट्ट ने बताया कि अगले दस साल भारत में जलवायु परिवर्तन का भविष्य तय होगा। रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि इंदौर की तरह अन्य शहर परिवहन और कचरा संग्रह में ई वाहनों का उपयोग करें। डीजल और सीएनजी खरीद जारी रखने वाले लंबी अवधि में ज्यादा लागत और अधिक उत्सर्जन का खतरा उठा रहे।

समय बढ़ने के साथ ई-वाहन ज्यादा किफायती

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 2025 ग्रिड मिक्स पर चलने वाली ई-बसों ने 10 प्रतिशत कम डीजल बसों की तुलना में कार्बन डाईआक्साईड का उत्सर्जन किया है। ग्रिड राष्ट्रीय विद्युत योजना में नवीकरणीय क्षमता बढ़ने के साथ इसमें ज्यादा लाभ होगा। 2030 तक ग्रिड 317 ग्राम CO2e प्रति किमी पर आ जाएगी। जो डीजल की तुलना में 56 प्रतिशत कम है। समय बढ़ने के साथ लाभ बढ़ेगा। 9 साल में एक ई-बस चलाने में अनुमानित कीमत 59.84 रुपए प्रति किमी आती है। जबकि डीजल में यह 61 रुपए प्रति किमी है। यानी 3 प्रतिशत की बचत होती है। जीवनकाल में प्रति वाहन लगभग 10 लाख रुपए के बराबर है। वहीं ई कचरा वाहन के इस्तेमाल से 6 साल में डीजल की तुलना में 14 प्रतिशत और सीएनजी की तुलना में 12 प्रतिशत की बचत होती है। डीजल और सीएनजी वाहनों में कीमत रखरखाव और कम ऊर्जा के चलते आती है।

Created On :   6 Oct 2026 11:46 PM IST

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