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Bhopal News: 108 एम्बुलेंस चलाने वाली कंपनी को 948 करोड़ भुगतान करने पर लोकायुक्त ने प्रमुख सचिव और एनएचएम से मांगा जवाब

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र में जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेस द्वारा चलाई जा रही 2061 एंबुलेंस (108 और जननी एक्सप्रेस) को किए गए 948 करोड़ के भुगतान पर लोकायुक्त संगठन ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर को नोटिस थमाया है। लोकायुक्त संगठन ने इसके पहले भी पत्र लिखकर शिकायत में लगाए गए आरोपों के बारे में वस्तुस्थिति मांगी थी, लेकिन जवाब नहीं पेश किया। 9 अक्टूबर को लोकायुक्त संगठन ने नोटिस देकर 25 नवंबर तक जवाब पेश करने के लिए कहा है। डिंडोरी और शहडोल जिलों रिकॉर्ड के अनुसार मरीज का नाम, मोबाइल नंबर और कॉलर का नाम जैसी आवश्यक जानकारियां चलाई गई एंबुलेंस के रिकॉर्ड में नहीं हैं। कुछ रिकॉर्ड में केवल एम्बुलेंस के किमी का विवरण है। जबकि 108 एम्बुलेंस और 108 जननी एक्सप्रेस सेवाओं का भुगतान रनिंग किमी के आधार पर करना होता है।
शिकायत में बताया गया है कि संबंधित एम्बुलेंस किसके अनुरोध पर बुक की गई, किस मरीज को लेकर किस अस्पताल पहुंचाया गया, यात्रा की दूरी कितनी थी और भुगतान के लिए प्रस्तुत किमी का सत्यापन किस आधार पर किया गया है, इसकी जांच की जाना चाहिए। शिकायत में विदिशा जिले में एम्बुलेंस के लगभग 500-600 किमी तक चलने का भी उल्लेख है, जबकि अन्य जिलों में प्रत्येक जिले में लगभग 25 से 30 एम्बुलेंस एंबुलेंस चल रही है। इन दावों और आंकड़ों का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान करने से वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जय अम्बे इमरजेंसी सर्विस ने श्रम कानूनों के विपरीत एम्बुलेंस सेवाओं का संचालन किया है। कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन भुगतान, ड्यूटी की शर्तों और श्रम कानूनों का पालन भी नहीं किया।
भ्रष्टाचार के लगाए आरोप
इधर, मंगलवार को कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और शिकायतकर्ता व आरटीआई कांग्रेस विभाग के प्रदेश अध्यक्ष पुनीत टंडन ने प्रेस कांफ्रेंस की। दोनों ने एनएचएम, 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस चलाने वाली कंपनी जय अंबे इमरजेंसी सर्विस पर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। ज्ञात हो कि शिकायतकर्ता टंडन कांग्रेस का पदाधिकारी है, उन्हीं की शिकायत पर प्रकरण की जांच की जा रही है।
कांफ्रेंस में आरोप लगाया गया कि जय अम्बे इमरजेंसी सर्विस को लगभग ₹948 करोड़ भुगतान किया गया। जबकि कंपनी ने अनुबंध की शर्तों, टेक्स भुगतान और श्रम कानूनों का पालन नहीं किया। इसके बावजूद कंपनी को इतनी मोटी रकम का भुगतान कर दिया गया। अनुबंध की शर्तों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों, बिलों और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी। शिकायत में यह भी आरोप है कि मप्र में छत्तीसगढ़ नंबर की एम्बुलेंस चलाई जा रही है, जिससे राज्य शासन को टेक्स नहीं दिए जाने से राजस्व की हानि हुई है।
Created On :   14 Oct 2026 11:39 PM IST















