Seoni News: सिवनी जिला अस्पताल में 5 महीने 17 दिन में 80 बच्चों की मौत, विधायक राय ने मुख्यमंत्री से की शिकायत, 6 साल में 1100 नवजात ने गंवाई जान

सिवनी जिला अस्पताल में 5 महीने 17 दिन में 80 बच्चों की मौत, विधायक राय ने मुख्यमंत्री से की शिकायत, 6 साल में 1100 नवजात ने गंवाई जान
बालाघाट के बाद सिवनी में आदिवासी और अन्य बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। सिवनी जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 1 महीने से कम उम्र के बच्चों की 13 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बाद 80 मौतें हो गई।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। बालाघाट के बाद सिवनी में आदिवासी और अन्य बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। सिवनी जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 1 महीने से कम उम्र के बच्चों की 13 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बाद 80 मौतें हो गई। बालाघाट में हुई मौतों का मामला थमा भी नहीं था कि सिवनी जिला अस्पताल की चिकित्सा सुविधा की पोल खुल गई। मामले को दबाने के लिए जिला प्रशासन ने बीते तीन साल के रिकॉर्ड से इन आंकड़ों की तुलना की है, ताकि मृत्युदर को तुलनात्मक तरीके से कम दिखाया जा सके। अस्पताल में हुई मौतों को लेकर क्षेत्रीय विधायक दिनेश राय मुनमुन ने मंगलवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शिकायत की है। विधायक मुनमुन ने निरीक्षण के बाद मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, जिल कलेक्टर को पत्र लिखे। लिखा कि लापरवाही के चलते बीते 4 महीने में नवजात बच्चों की मौतें बढ़ गई है। बच्चों की देखभाल सही से नहीं होने से मौतें हो रही है। मुख्यमंत्री से मुलाकात में उन्होंने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। विधायक ने दैनिक भास्कर को बताया कि मृत बच्चों में 23 आदिवासी बच्चे हैं, जबकि 27 ओबीसी और शेष अन्य बच्चे है। ये वे बच्चे हैं, जो जन्म के एक महीने के भीतर ही दम तोड़ चुके। नवजात बच्चों की मौतों पर आयुक्त स्वास्थ्य एनराजू एस. से बात करना चाही, लेकिन उन्होंने कोई पक्ष नहीं रखा।

इधर, सिवनी जिला प्रशासन एसएनसीयू की मौताें पर अभिमत दिया कि नवजात बच्चों की मौतों में बीते सालों के रिकॉर्ड को देखा जाए तो इस साल गिरावट आई है। विभाग ने जांच रिपोर्ट भी तैयार की, इसमें आंकड़ों का विश्लेषण कर बताया कि बीते सालों की तुलना में जिला अस्पताल नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा दर में सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि जिला अस्पताल में वर्ष 2020-21 में मृत्यु दर 13.4% थी, जाे कि घटकर लगभग आधी 6-7 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि 13 अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच अस्पताल में 3,793 प्रसव हुए। इनमें 1,824 सामान्य और 1,969 सीजेरियन प्रसव थे। इस अवधि में एसएनसीयू में भर्ती किए गए 80 नवजातों को नहीं बचाया जा सका। इनमें से 60 शिशु अत्यधिक कम वजन (लो बर्थ वेट) वाले और 44 बेहद नाजुक श्रेणी 400 से 1500 ग्राम वजन वाले बच्चे थे। जिला प्रशासन ने बताया कि कई नवजात निजी नर्सिंग होम और अन्य दूरस्थ शासकीय केंद्रों से समयपूर्व जन्म और श्वास संबंधी जटिलताएं में अंतिम समय पर रेफर होकर जिला अस्पताल लाए गए थे। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग अपनी सेवाओं के लिए मृत्यु दर कम करने के के लिए काम किया जा रहा है। जांच दल ने सुधार के लिए ड्यूटी रोस्टर का पालन, 48 घंटे के भीतर अनिवार्य डेथ ऑडिट, अत्याधुनिक उपकरणों की नियमित तकनीकी जांच और एसएनसीयू पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग की कार्रवाई शुरू की गई।

नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य सुविधा पर उठाए सवाल

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंघ सिंघार ने एक्स पर लिखा कि बालाघाट के बाद अब सिवनी में नवजातों की मौत की जवाबदेही कौन लेगा। सिवनी में मृत नवजातों में 29 बच्चे आदिवासी समाज से थे। ज्यादातर बच्चों की मौत सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि मप्र के अस्पतालों में कहीं डिलीवरी के नाम पर वसूली, कहीं मरीजों को पीठ पर उठाकर ले जाने की मजबूरी, तो कहीं प्रसूताओं से सफाई करवाई जा रही है। यह कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था है, जहां गरीबों और आदिवासी परिवारों की जान की कोई कीमत नहीं? आखिर मासूमों की मौत पर चुप्पी क्यों? उन्होंने कहा कि सिवनी सहित प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों की निष्पक्ष जांच कर सरकार एवं अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई मुख्यमंत्री को करना चाहिए।

छह साल में 13275 एडमिट हुए, 1100 की मौत

- 2020-2021 में 2137 बच्चे एडमिट किए गए। इनमें से मृत्यु 279 की मृत्यु हुई। (13.4 %)

- 2021-2022 में 2069 बच्चों को एडमिट किया, इनमें से 196 की मृत्यु हुई। (9.6%)

- 2022-2023 में 2183 एडमिशन हुए। इनमें से 190 की मृत्यु हुई (8.7%)

- 2023-2024 में 2019 एडमिशन हुए, इनमें से मृत्यु 118 की हुई। (5.8%)

- 2024-2025 में 1815 बच्चे एडमिट किए गए। इनमें से 108 की मौत हुई (6.0%)

- 2025-2026 में 1937 को भर्ती किया, इनमें से 129 मृत्यु की मौत हुई। (6.6%)

- वर्ष 2026-2027 में (13 अप्रैल से 30 सितंबर तक) 1088 बच्चे एडमिट किए गए। इनमें से मृत्यु 80 की मौत हुई। (7.4%)

इनका है कहना...

- मैंने अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान कई तथ्य सामने आए। सुविधाओं की कमी है। मैंने मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को निरीक्षण के दिन ही ई-मेल कर नवजातों की मौतों के बारे में लिख दिया था। आज (मंगलवार) को मुख्यमंत्री से मिलकर सारी चीजें बता दी है, उन्होंने विभाग से जांच रिपोर्ट मंगाई है।

दिनेश राय मुनमुन, विधायक सिवनी

- कम वजन, समयपूर्व जन्म लेने वाले और सांस संबंधी गंभीर समस्या सहित अन्य गंभीर बच्चों की मौतें हुई है। इनमें कुछ नवजात निजी नर्सिंग होम और दूसरे सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं से गंभीर अवस्था में रेफर होकर आए थे। जांच दल की अनुशंसाओं के अनुसार शिशुओं के उपचार एवं देखभाल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा।

पंकज दुबे, सीएमएचओ, सिवनी

Created On :   14 Oct 2026 10:52 PM IST

Tags

Next Story