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MP News: बुधनी में आदिवासी परिवारों के जमीन मामले में मुख्यमंत्री ने कहा जांच के आदेश दिए, विपक्ष ने कहा सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती

डिजिटल डेस्क, भोपाल। सीहोर जिले की बुधनी के ग्राम कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर जमकर सियासत हो रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब विपक्ष ने प्रशासन को घेरा है। वहीं मीडिया के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि मेरी जानकारी में विषय आया है। मामले की जांच कराएंगे, मैंने मुख्य सचिव को बोला है। वन अफसरों से मैंने रिपोर्ट मांगी है, हमारे वरिष्ठ नेता ने बात रखी है, जांच कराएंगे। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा, हमारी सरकार संवेदनशील है। ज्ञात हो कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने गृह जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के जमीन मामले में धरने पर बैठे थे। उन्होंने आदिवासियों के आशियाने तोड़ने और जमीन को लेकर अधिकारियों पर नाराजगी जताई थी। शिवराज ने अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी।
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इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले को लेकर कहा कि आदिवासी परिवारों के साथ हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती। जनता को बयान नहीं, जवाब और पीड़ितों को न्याय चाहिए। पटवारी ने कहा पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा मामला उठाने का जिक्र किया। पटवारी ने कहा सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कोसमी गांव में वास्तव में क्या हुआ, वन विभाग की कार्रवाई किन आदेशों के तहत की गई और क्या प्रभावित परिवारों के अधिकारों और कानूनी दावों की उचित जांच की गई थी। यदि कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी क्यों होनी चाहिए। सरकार आदिवासी परिवारों के वनाधिकार कानून के तहत दावों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रही है। कितने दावे लंबित हैं, कितने पात्र परिवारों को अधिकार मिले हैं और कितने परिवार आज भी अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार इन सवालों पर पारदर्शी आंकड़े सार्वजनिक करे। शिवराज सिंह चौहान के बयान के बाद मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे मामले की सच्चाई सामने लाएं और ठोस कार्रवाई करें।
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पन्ना में भी प्रभावितों को मिले उचित मुआवजा
पटवारी ने कहा कि पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का प्रश्न भी सरकार की जवाबदेही से जुड़ा है। विकास परियोजनाओं के नाम पर प्रभावित परिवारों को अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता। यह सुनिश्चित किया जाए कि हर पात्र परिवार को नियमानुसार मुआवजा, सुरक्षित पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा मिले।
Created On :   13 Oct 2026 11:20 PM IST













