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MP News: मेडिकल यूनिवर्सिटी को जबलपुर, भाेपाल और उज्जैन तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव, विभाजन के बाद 120 करोड़ अलग से सालाना होगा खर्च

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र मेडिकल यूनिवर्सिटी को जबलपुर, भोपाल और उज्जैन तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। जबलपुर क्षेत्र में 14 जिले, भोपाल क्षेत्र में 18 और मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन में भी 18 जिले शामिल करने का प्रस्ताव बनाया गया है। 9 मई को इस प्रस्ताव पर बैठक होना थी, लेकिन टल गई। सूत्रों के अनुसार यूनिवर्सिटी को तीन नहीं, दो हिस्सों में विभाजित करने को लेकर फिर से मंथन किया जा रहा है। फिलहाल मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन को लेकर तैयार प्रस्ताव के अनुसार 3 हिस्से किए जा सकते हैं।
मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में यूनिवर्सिटी विभाजित की जाएगी, जिस पर वर्तमान में सालाना औसतन 150 करोड़ खर्च का अनुमान है। जबकि यूनिवर्सिटी को संबद्धता, परीक्षा शुल्क, नामांकन, प्रकाशन, बैंक खातें-ब्याज व अन्य आय स्त्रोत से 70-75 करोड़ रुपए ही आय हो रही है, जबकि अनुमानित औसत व्यय 30-40 करोड़ है।
शासन द्वारा तैयार नए प्रस्ताव पर अमल किया जाता है तो अतिरिक्त 2 मेडिकल यूनिवर्सिटी खुलने (विभाजन के बाद) से तो हर साल करीब 120 करोड़ का बोझ बढ़ेगा। लेकिन मुख्यमंत्री की मंशानुसार मेडिकल यूनिविर्सटी का तीन हिस्सों में विभाजन किया जाना है, इसमें एक यूनिवर्सिटी उज्जैन में प्रस्तावित है। प्रबंधन से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की अलग से जरूरत होगी।
यूनिवर्सिटी के तहत चिकित्सा शिक्षा , डेंटल एजुकेशन, आयुष, परीक्षाओं का आयोजन, थीसिस का अनुमोदन और मूल्यांकन, एग्जाम परिणाम और डिग्री देने और वर्तमान में 78 मेिडकल-पैरामेिडकल संस्थाओं को संबद्धता देने का काम किया जा रहा है। इनमें मेडिकल कॉलेज 26, डेंटल कॉलेज 7, बीएएमएस 24, होम्योपैथी 13, यूनानी 4, आरसीआई 2 और योग एवं नेचुरोपैथी कॉलेज 2 शामिल है।
इसलिए किया जा रहा विभाजन
मेडिकल यूनिवर्सिटी 2011 में स्थापित की गई। अब इसे 3 मेडिकल यूनिवर्सिटी में विभक्त करने के पीछे क्षेत्रीय की आवश्यकता अनुसार संतुलन बैठाकर काम आसान करना है। नवीन शिक्षण व्यवस्था, रिसर्च और ट्रेनिंग कार्यक्रमों में लाभ मिलेगा। डिजिटल एग्जाम पैटर्न और एकेडमिक मॉनिटरिंग आसान करने का तर्क है। रिसर्च प्रबंधन में सहायता होगी। प्रशासकीय निगरानी और शैक्षणिक नियंत्रण आसान होगा। तीन यूनिवर्सिटी होने से मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच आसान होगी। मुद्दों को हल करने में भी आसानी होगी। जहां अभी छात्रों को यूनिवर्सिटी में काम होने पर दूर जाना पड़ता है, परीक्षा में देरी, यूनिवर्सिटी की स्थापना से ही विवादों में बने रहने की छवि दूर करना, और छात्रों की समस्याओं का विकेंद्रीकरण करना है।
क्या है नुकसान
नई 2 यूनिवर्सिटी बनने से औसतन 80 करोड़ हर साल अतिरिक्त वित्तीय व्यय हो सकता है। अतिरिक्त कर्मचारियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मशीनरी का खर्च आएगा। प्रशासनिक एकरूपता और समन्वय में भी कमी आ सकती है। जबतक यूनिवर्सिटी खुद आय जनरेट नहीं कर पाती तब तक पोषित अनुदान की आवश्यकता होगी। आिर्थक भ्रष्टाचार बढ़ेगा। आरोप है कि संस्थागत ढांचे में खामियां होने और राजनीतिक लाभ के लिए तीन हिस्से किए जा रहे हैं।
मेडिकल यूनिवर्सिटी अिधनियम-2011 में संशोधन करना होगा। अतिरिक्त खर्च होगा। अतिरिक्त मानव संसाधनों की भर्ती करना होगी, जबकि वर्तमान यूनिवर्सिटी में ही प्रतिनियुक्ति से काम चलाया जा रहा है। तीनों यूनिवर्सिटी में प्रशासकीय एकरूपता और समन्वय की कमी रहेगी। तीनों अपने-अपने अनुसार काम करने से समरूपता नहीं रहेगी।
तीनों यूनिवर्सिटी को ऐसे बांटने का प्रस्ताव है
जबलपुर मेडिकल यूनिविर्सटी- जबलपुर, सतना, रीवा, सिंगरौली, शहडोल , सिवनी, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, पन्ना, मंडला, सीधी, उमरिया, डिंडोरी, बालाघाट
भोपाल मेडिकल यूनिविर्सटी- भोपाल, विदिशा, सागर, दमोह, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सीहोर
उज्जैन मेडिकल यूनिविर्सटी- उज्जैन, नीमच, मंदसौर, इंदौर, रतलाम, देवास, धार, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, आगर मालवा, नीमच
इनका कहना है
जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी को तीन यूनिवर्सिटी का विभाजन अभी प्रस्तावित है। इस पर निर्णय नहीं हुआ है।
अशोक वर्णवाल,अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग
Created On :   5 Jun 2026 10:07 PM IST











